नूरपुर – सवर्ण राणा
पूर्व वन मंत्री राकेश पठानिया ने नूरपुर नगर परिषद, जिला परिषद और पंचायत निकाय चुनावों में उन पर लगाए भीतरघात के आरोपों को खारिज किया। पठानिया ने पत्रकार वार्ता में कहा कि इन सभी मुद्दों पर एक माह पूर्व संगठन की बैठक में प्रभारी, सह प्रभारी, सांसद, जिला महामंत्री और जिला अध्यक्ष की मौजूदगी में चर्चा हो चुकी थी।
उन्होंने कहा कि फतेहपुर में चारों जिला परिषद वार्डों में उनके और पार्टी समर्थित प्रत्याशियों के खिलाफ उम्मीदवार खड़े किए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके वन मंत्री रहते परिवर्तन रैली आयोजित की गई तथा जगह-जगह रणवीर निक्का के पोस्टर लगाए गए। उस समय डॉ. राजीव भारद्वाज प्रदेश सह प्रभारी थे, लेकिन तब उन्हें अनुशासनहीनता नजर नहीं आई।
राकेश पठानिया ने कहा कि वह वर्ष 1996 से नूरपुर से चुनाव लड़ते आ रहे हैं और क्षेत्र के लोगों के साथ उनके पारिवारिक संबंध हैं। उन्होंने कहा कि किसी को चुनाव लड़ने से रोका नहीं जा सकता। यदि कोई व्यक्ति पोस्टरों पर उनकी तस्वीर लगाता है तो वह उसका व्यक्तिगत निर्णय है। उन्होंने कहा कि नूरपुर नगर परिषद चुनाव में उन्हें दरकिनार किया गया, जिसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ा।
उन्होंने आरोप लगाया कि नूरपुर में पिछले पौने चार वर्षों में कोई बड़ा विकास कार्य नहीं हो पाया है। मातृ-शिशु अस्पताल, फिन्ना सिंह नहर और कॉलेज सहित कई परियोजनाओं के कार्य लंबित पड़े हैं। पठानिया ने कहा कि उन्होंने नूरपुर नगर परिषद के लिए 5 करोड़ 75 लाख रुपये की राशि उपलब्ध करवाई थी, जबकि सांसद की ओर से बाजार के लिए केवल 30 लाख रुपये दिए गए।
उन्होंने अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि नूरपुर को पुलिस जिला, टिंबर डिपो, फोरेंसिक लैब सहित कई नए कार्यालय मिले। पत्रकार वार्ता में पठानिया ने कहा कि वह भाजपा के एक कर्मठ सिपाई हैं लेकिन जिस तरह के गंभीर आरोप उनके ऊपर लगाए गए, उन्हें कोसा गया और नगर परिषद चुनाव में हार का उन्हें विलेन ठहराने की कोशिश की गई, वह बर्दाश्त नहीं होगा।
इससे पूर्व पूर्व वन मंत्री के निवास पर नूरपुर क्षेत्र के चारों जिला परिषद वार्डों से राकेश पठानिया समर्थित प्रत्याशियों ने उनसे मुलाकात की। इस दौरान पठानिया ने प्रत्याशियों को पटका पहनाकर चुनाव में जीत की शुभकामनाएं दीं।

