हिमखबर डेस्क
कभी नंगे पैरों स्कूल जाना पड़ा, तो कभी कॉपी-पेंसिल की कमी ने सपनों की राह कठिन कर दी। किसान पिता और मां ने हालातों से हार नहीं मानी और बेटी की पढ़ाई के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी।
उसी संघर्ष को नंदिनी ठाकुर ने अपनी मेहनत और लगन से सफलता में बदल दिया। पंजावर गांव की इस साधारण परिवार की बेटी ने असाधारण उपलब्धि हासिल करते हुए संघ लोक सेवा आयोग की कंबाइंड भू वैज्ञानिक परीक्षा में देशभर में टॉप कर लिया। नंदिनी की इस कामयाबी ने न सिर्फ परिवार, बल्कि पूरे गांव को गर्व और खुशी से भर दिया है।
नंदिनी ने पहली से 12वीं तक गांव के सरकारी स्कूल से पढ़ाई की। इसके बाद दौलत राम कॉलेज से बीएससी फिजिक्स ऑनर और डीयू से एमएससी फिजिक्स की पढ़ाई पूरी की। नंदिनी का मानना है कि पढ़ाई और मंजिल किसी पर थोपी नहीं जाती, बल्कि लक्ष्य पाने के लिए अंदर से प्रेरित होना जरूरी है।
नंदिनी बताती हैं कि बचपन में कई बार पहनने के लिए चप्पल तक नहीं होती थी। छोटी उम्र में ही यह समझ आ गया था कि मेहनत और पढ़ाई में एकाग्रता ही ऐसा विकल्प है, जिसके बल पर वह परिवार का सिर गर्व से ऊंचा कर सकती हैं। परिवार का पेशा खेतीबाड़ी रहा। वो पढ़ाई के साथ कामकाज में भी हाथ बंटाती रहीं। नंदिनी सफलता का श्रेय पिता संजय ठाकुर और माता राजरानी को देती हैं। परिजनों ने उन्हें पढ़ाई का अनुकूल माहौल दिया। पढ़ने से कभी नहीं रोका।
पिता संजय ठाकुर ने कहा कि उन्होंने गरीबी देखी है, लेकिन बेटी ने मेहनत से जो मुकाम हासिल किया है, उसके लिए शब्द कम पड़ जाते हैं। माता राजरानी ने बताया कि वह पशुपालन और घरेलू काम के साथ परिवार संभालती रहीं।
सफलता के टिप्स
- माहौल : माता-पिता ने पढ़ने का माहौल दिया।
- प्रेरणा : खुद को कुछ करने के लिए प्रेरित किया।
- अनुशासन : पढ़ने के लिए तय किए समय का अनुशासन कभी नहीं छोड़ा।

