प्राकृतिक उत्पादों पर एमएसपी प्रदान करने पर हिमाचल बना देश का पहला राज्य : हेमिस नेगी

--Advertisement--

प्राकृतिक खेती पर दो  दिवसीय  कार्यशाला का सफल आयोजन

सुंदरनगर (मंडी), 25 अक्तूबर – हिमखबर डेस्क

कृषि विभाग  हिमाचल प्रदेश के अंतर्गत कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण (आत्मा) मंडी द्वारा प्राकृतिक खेती विषय पर दो दिवसीय मंडल स्तरीय कार्यशाला का आज सफल समापन हुआ। कार्यशाला में मंडी, कुल्लू, बिलासपुर और लाहौल-स्पीति जिलों के सैकड़ों प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया।

यह प्रदेश में मंडल स्तर पर आयोजित दूसरी कार्यशाला रही। इससे पहले कांगड़ा में ऐसी कार्यशाला सफलतापूर्वक आयोजित की जा चुकी है। मुख्य अतिथि राज्य परियोजना निदेशक हेमिस नेगी  ने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि प्राकृतिक उत्पादों की बढ़ती मांग किसानों के लिए आय के नए अवसर खोल रही है।

उन्होंने बताया कि सरकार के निर्देशानुसार यह कार्यशाला आयोजित की गई है, ताकि प्राकृतिक खेती के प्रसार को संस्थागत रूप दिया जा सके। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने प्राकृतिक उत्पादों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) देने का निर्णय लिया है।

राज्य में गेहूं, मक्की, जौ और हल्दी पर सर्वाधिक एमएसपी प्रदान की जा रही है, ताकि अधिक से अधिक किसान प्राकृतिक खेती को अपनाएं। हेमिस नेगी ने कहा कि किसानों के प्राकृतिक उत्पादों को राज्य से बाहर बेचने के प्रयास भी जारी हैं। प्रदेश में सात फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियां बनाई गई हैं, जो उत्पादों के विपणन और मार्केट लिंकेज में सहयोग कर रही हैं।

उन्होंने बताया कि ऑनलाइन प्लेटफार्म जैसे फिल्पकार्ट पर भी प्राकृतिक उत्पादों की बिक्री को लेकर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एसपीआईयू में एक समर्पित मार्केटिंग सेल स्थापित करने की योजना सरकार को भेजी जाएगी, जिससे किसानों को सीधे बाजार तक पहुंच और बेहतर मूल्य मिल सके।

प्राकृतिक खेती के विविध पक्षों पर विशेषज्ञों ने दिए व्याख्यान

दूसरे दिन के सत्रों में विशेषज्ञों ने प्राकृतिक खेती के तकनीकी, जैविक और विपणन पक्षों पर उपयोगी जानकारी दी।पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ मनदीप कुमार ने देसी गाय की भूमिका पर कहा कि यह न केवल जैविक खाद निर्माण का आधार है, बल्कि प्राकृतिक खेती प्रणाली की आत्मा है।

कृषि विज्ञान केन्द्र की वैज्ञानिक डॉ नेहा चौहान ने मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों पर जानकारी दी। कृषि फसल बीमा योजना के प्रतिनिधि चन्द्रशेखर ने किसानों को फसल बीमा की प्रक्रिया और उसके लाभों से अवगत करवाया।

एपीएमसी मंडी के सचिव भूपेंद्र ठाकुर ने प्राकृतिक उत्पादों के विपणन और ‘हिम भोग ब्रांड के माध्यम से किसानों को उचित मूल्य प्राप्त करने के अवसरों पर प्रकाश डाला। एसपीआईयू के उप निदेशक डॉ मोहिंदर भवानी ने राज्य और केंद्र प्रायोजित प्राकृतिक खेती योजनाओं की रूपरेखा और उनके प्रभावी क्रियान्वयन की जानकारी दी।

किसानों के अनुभव बने प्रेरणा का स्रोत

कुल्लू, मंडी और लाहौल-स्पीति जिलों के प्रगतिशील किसानों ने प्राकृतिक खेती अपनाने से हुए सकारात्मक बदलाव साझा किए। उन्होंने बताया कि इस पद्धति से भूमि की उर्वरता बढ़ी है, रासायनिक लागत घटी है और फसलों की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। किसानों ने कहा कि प्राकृतिक खेती ने उन्हें आत्मनिर्भर और पर्यावरण-अनुकूल कृषि की दिशा में अग्रसर किया है।

कार्यक्रम में यह रहे उपस्थित

इस अवसर पर कार्यकारी निदेशक डॉ अतुल डोगरा, पद्मश्री नेक राम शर्मा, डॉ मोहिंदर भवानी (उप निदेशक, एसपीआईयू), डॉ मनदीप कुमार (उप निदेशक, पशुपालन विभाग), भूपेंद्र ठाकुर (सचिव, एपीएमसी मंडी), हेम राज (कंसल्टेंट, प्राकृतिक खेती), और रामचंदर चौधरी (उप निदेशक कृषि, मंडी) सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

--Advertisement--
--Advertisement--

Share post:

Subscribe

--Advertisement--

Popular

More like this
Related

विदेश जाना हुआ महंगा, सरकार ने बढ़ाई पासपोर्ट की आवेदन फीस, री-इश्यू करवाना भी महंगा

हिमखबर डेस्क विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट बनवाने की फीस बढ़ा...

Teacher Eligibility Test: हिमाचल में शिक्षकों को 31 अगस्त से पहले पास करना होगा TET

हिमखबर डेस्क हिमाचल सरकार ने इन सर्विस टीचर्स के लिए शिक्षक...

टांडा मेडिकल कॉलेज का पानी पीने लायक नहीं

हिमखबर डेस्क डाक्टर राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा महाविद्यालय टांडा...