पशुपालन मंत्री चंद्र कुमार के गृह क्षेत्र में बेसहारा पशुओं का नहीं कोई सहारा

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सरकार द्वारा पशुओं के उपचार को मोबाइल बैन शुरू करने के दावों की खुल रही पोल

ज्वाली – अनिल छांगू

हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा पशुओं के उपचार हेतु मोबाइल बैन चलाई गई है तथा घर-द्वार घायल पशुओं का उपचार करने का दावा किया जा रहा है लेकिन कृषि एवं पशुपालन मंत्री चन्द्र कुमार के गृह क्षेत्र ज्वाली में ही कई मवेशी घायल अवस्था में घूम रहे हैं जिनको देखकर हर किसी का दिल पसीज रहा है।

इनका उपचार करने के लिए पशुपालन विभाग से गुहार लगाने के बाद भी कोई नहीं आता है। कुछ समाजसेवी संस्थाओं द्वारा इन घायल पशुओं को पकड़कर इनका उपचार अपने खर्च पर किया जाता है। मंत्री चन्द्र कुमार के गृह क्षेत्र में ही दावों की पोल खुल रही है। मंत्री चन्द्र कुमार भी बेसहारा पशुओं का सहारा नहीं बन रहे हैं।

अब ऐसा ही मामला हरसर पंचायत में भी देखने को मिला है। हरसर पंचायत में एक बेसहारा बैल काफी जख्मी हालत में है। बेसहारा बैल का कान कट चुका है और गहरा जख्म पड़ा हुआ है। यह बेसहारा बैल मदद के लिए इधर-उधर भटकता रहता है। इसको पकड़ने की स्थानीय युवाओं ने काफी कोशिश की परन्तु जख्म में दर्द होने के डर से यह दूर भाग जाता है।

पशुपालन विभाग के कर्मियों को भी अवगत करवाया गया लेकिन जख्मी बैल को मरहम लगाने कोई भी नहीं आया। बुद्धिजीवियों ने प्रशासन व पशुपालन विभाग से मांग की है कि घायल बैल को पकड़कर इसे गौशाला में ले जाकर इसका उपचार किया जाए ताकि इसकी जान बच सके।

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