कांगड़ा जिला में 1224 निराश्रित बच्चों को चिल्ड्रन ऑफ स्टेट का दर्जा

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निराश्रित बच्चों के सपनों को सुखाश्रय ने लगाए स्वाभिमान के पंख, अभिभावक के रूप में बच्चों का सुनहरी भविष्य बुन रही सुख की सरकार

काँगड़ा – राजीव जस्वाल

सुखाश्रय ने निराश्रित बच्चों के सपनों को साकार करने में स्वाभिमान के पंख लगा दिए हैं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने निराश्रितों को चिल्ड्रन आफ स्टेट का दर्जा दिया गया है। अब सरकार अभिभावक के रूप में निराश्रितों की उचित देखभाल सुनिश्चित कर रही है। सरकार की इस पहल में निराश्रित बच्चों को अपना भविष्य भी सुनहरा दिखाई दे रहा है।

कांगड़ा जिला की बात करें तो विभिन्न बालश्रमों तथा चाइल्ड केयर संस्थानों तथा अन्य जगहों जीवन यापन कर रहे 1224 निराश्रित बच्चे लाभांवित होंगे। सुखाश्रय योजना के आरंभ होने पर निराश्रित बच्चों के चेहरों पर रौनक देखते ही बनती है।

कांगड़ा जिला में सुखाश्रय योजना के तहत बालिका आश्रम गरली, तितली चिल्ड्रन होम, रामानंद गोपाल रोटरी हॉस्टल सलयाणा, होम फॉर लोकोमोटर डिसेबल्ड चिल्ड्रन, ओपन शेल्टर होम शामिल हैं।

इन संस्थानों में बच्चों के उचित देखभाल के लिए सुखाश्रय कार्यक्रम के तहत सरकार द्वारा मदद मुहैया करवाई जा रही है। इन देखभाल संस्थानों में 81 निराश्रित बच्चे जीवन यापन कर रहे हैं इसके अतिरिक्त कांगड़ा जिला में सुखाश्रय योजना के तहत 1143 निराश्रित बच्चों की सरकार अभिभावक के तौर पर अपना फर्ज अदा करेगी।

सुखाश्रय की मदद से 15 निराश्रित बच्चों को मिलेगी

राज्य में ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार बनने के बाद सुखाश्रय योजना के आरंभ होने पर कांगड़ा जिला के 15 निराश्रित बच्चों के लिए उच्च शिक्षा की राहें खोल दी हैं वहीं पर चार निराश्रित बच्चों को वोकेशनल ट्रेनिंग में दाखिला दिया गया है इसी तरह से दो निराश्रित बच्चों को गृह निर्माण तथा एक को विवाह अनुदान के लिए स्वीकृति की प्रक्रिया चल रही है।

निराश्रित बच्चों की अभिभावक बनी सरकार

अब हिमाचल में 27 वर्ष तक की आयु केे निराश्रित बच्चों की सरकार अभिभावक की भूमिका निभाएगी। अनाथ बच्चे किसी भी तरह की उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहे वो एमबीबीएस या आईआईटी ही क्यों न हो, इसकी पूरी फीस और हॉस्टल का सारा खर्च सरकार वहन करेगी। इसके अतिरिक्त प्रतिमाह 4000 रुपये पॉकेट मनी अलग से दी जाएगी।

अनाथ बच्चे साल में एक बार हवाई जहाज से शैक्षणिक भ्रमण कर पाएंगे। उनके भारत के किसी भी राज्य में आने जाने और ठहरने का पूरा खर्च भी सरकार उठाएगी। जिस भी प्रदेश में जाएंगे उन्हें तीन स्टार होटल में ठहराया जाएगा। 10 हजार उनको कपड़ों के लिए उपलब्ध करवाया जाएगा। स्वरोजगार के लिए भी आर्थिक मदद दी जाएगी इसके अतिरिक्त 27 वर्ष की आयु के उपरान्त घर बनाने के लिए भी जमीन भी सरकार उपलब्ध करवाएगी।

पहली मर्तबा किसी सरकार ने निराश्रित बच्चों की उठाई जिम्मेदारी

ओपन शेल्टर होम के संचालक स्वास्तिक मस्ताना द्वारा सुखाश्रय योजना आरंभ करने पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि पहली बार किसी सरकार ने निराश्रित बच्चों को निशुल्क शिक्षा, कोचिंग तथा त्यौहार भत्ता देने का बीड़ा उठाया है।

उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह ने सभी निराश्रित बच्चों को स्वाभिमान से जीने के लिए पहल की है इस के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह का धन्यवाद करते हैं।

होम फॉर लोकोमोटर डिसेबल्ड चिल्ड्रन की संचालिका लीला ठाकुर का कहना है कि वह पिछले वर्षों से निराश्रित संस्थानों का संचालन कर रहे हैं लेकिन पहली मर्तबा किसी सरकार ने निराश्रित बच्चों के लिए सराहनीय कार्य किया है।

लुथान में बनेगा आदर्श ग्राम सुखाश्रय परिसर

उपायुक्त डॉ. निपुण जिंदल ने कहा कि निराश्रित बच्चों के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं एवं कार्यक्रमों का सुचारू कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लुथाण में आदर्श ग्राम सुखाश्रय परिसर के लिए भी
भूमि भी चयनित की गई है।

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