मूसलाधार बारिश ने ढाया कहर, राष्ट्रीय स्तर के पहलवान की खुशियों को बाढ़ में बहा ले गई ब्यास नदी

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मंडी- अजय सूर्या

दंगल में बड़े-बड़े पहलवानों को चित करने वाले पिता-पुत्र राजू व देव की खुशियों को ब्यास नदी अपनी बाढ़ में बहा ले गई। मंडी के लोअर भ्यूली क्षेत्र में रहने वाले राजू पहलवान का घर ब्यास की भेंट चढ़ गया है। पदक और बेटे देव के प्रमाण-पत्रों तक को संभालने का मौका नहीं मिला।

देव को खेल कोटे से नौकरी लगनी थी, उसे अगले महीने शिमला बुलाया गया था। अब दोनों पिता-पुत्र बिपाशा सदन में आ रहे नेताओं से सहायता मांग रहे हैं। प्रश्न यह है कि अपना पहलवान होना कैसे सिद्ध करें?

47 वर्षीय राजू पहलवान कहते हैं, ‘मैं तो मेलों में ही पहलवानी करता था, लेकिन बेटे ने राष्ट्रीय स्तर पर कुश्ती प्रतियोगिताओं में भाग लेकर मान बढ़ाया। मेरे और बेटे के कई पदक थे।

वर्ष 2021 और 2022 में देव ने बनारस में राष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता में रजत पदक पाया था। फिर कोलकाता में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिमाचल की टीम के साथ भाग लिया। तीन बार हिमाचल केसरी, दो बार हिमाचल कुमार रहने के साथ कई पदक और थे।

22 वर्षीय देव का ट्रायल खेलो इंडिया के अंतर्गत बिलासपुर में हुआ था। वहीं से वह आगे कुश्ती प्रतियोगिताओं में भाग ले रहे थे। उन्हें घर, गहने, नकदी जाने का मलाल है, पर पदकों और प्रमाणपत्रों के बहने का दुख अधिक है।

आंखों के सामने नदी में समा गया घर

छोटी काशी के लोगों को ब्यास ऐसे बड़े जख्म दे गई, जो लंबे समय तक नहीं भरेंगे। पुरानी मंडी के सुरेंद्र कुमार का घर उसकी आंखों के सामने उफनती ब्यास में समा गया।

शीला देवी और राम सिंह ने अपनी आंखों के सामने घर का सामान एक-एक कर तिनके की तरह बहता देखा। कमोबेश यहां हर व्यक्ति की ऐसी ही दुख भरी कहानी है।

पीड़ित वनकर्मी राजीव और अन्य का कहना है ब्यास का ऐसा रौद्र रूप कभी उन्होंने नहीं देखा। 48 वर्ष का राजीव वन विभाग की खलियार कालोनी में रहता है। उसके पिता जगदीश भी वनकर्मी थे। राजीव का जन्म यहीं पर हुआ था।

दुख यह भी है कि पीडि़तों का पहले बाढ़ से नुकसान हुआ, अब घरों की सफाई के लिए पानी पर पैसा खर्च करना पड़ा रहा है। पेयजल आपूर्ति बाधित है। 1500 से 3000 रुपये तक पानी का एक टैंकर मिल रहा है। गाद निकासी अपने आप में एक युद्ध है।

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