16 मई से सामूहिक हड़ताल पर जाएंगे ब्लॉक तथा पंचायत स्तर के कर्मचारी

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परागपुर – आशीष कुमार

विकास खंड परागपुर की ग्राम पंचायतों में कार्यरत पंचायत सचिवों, तकनीकी सहायकों और कनिष्ठ अभियंताओं ने एलान किया है कि यदि 15 मई तक प्रदेश सरकार ने जिला परिषद कैडर के कर्मचारियों की मांगों को नहीं माना तो वे 16 मई से सामूहिक हड़ताल पर जाएंगे। इसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी ।

खंड कार्यालय परागपुर में बुधवार को पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक और कनिष्ठ अभियंताओं ने बीडीओ परागपुर के माध्यम से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर तथा संबंधित विभाग के निदेशक को मांग पत्र प्रेषित किया। इसमें मांग की गई है कि जिला परिषद कैडर के कर्मचारियों का पंचायतीराज या ग्रामीण विकास विभाग में विलय किया जाए तथा उन्हें सरकारी कर्मचारियों की तर्ज पर छठे वेतन आयोग का लाभ दिया जाए । ऐसा न होने पर जिला परिषद कैडर के समस्त कर्मचारी सामूहिक हड़ताल पर चले जाएंगे।

पूरे प्रदेश में जिला परिषद कैडर के कर्मचारी छठे वेतन आयोग का लाभ न मिलने के गुस्सा हैं । सरकार के वित्त विभाग की ओर से यह तर्क दिया गया है कि जिला परिषद कैडर के कर्मी सरकारी कर्मचारी नहीं हैं। इस कारण उन्हें छठे वेतन आयोग का लाभ नहीं दिया जा सकता।

विकास खंड सचिव एसोसिएशन के अध्यक्ष रामकृष्ण ने बताया कि पंचायत सचिव पिछले 22 वर्षों से विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और अब यह कहा जा रहा है कि जिला परिषद कैडर के कर्मी सरकारी कर्मचारी नहीं है, जबकि उनसे हर विभाग का काम करवाया जा रहा है।

पंचायत सचिवों का कहना है कि यदि वे जिला परिषद के कर्मचारी हैं तो उनसे जिला परिषद के अलावा अन्य विभागों का कार्य क्यों करवाया जा रहा है। अब तकनीकी सहायकों ने भी मनरेगा मद से वेतन लेने से इनकार कर दिया है। इस वर्ग के कर्मचारियों ने सरकारी कर्मचारियों की तरह समस्त वित्तीय लाभ प्रदान करने की मांग भी रखी है और सेवानिवृत्ति के उपरांत भी समस्त प्रकार के वित्तीय लाभों का मामला उठाया है ।

क्या कहते है पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर

इस बाबत जब ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री वीरेंद्र कंवर से बात हुई तो उन्होंने कहा कि मामला सरकार के विचाराधीन है। जल्द ही इस मामले को कैबिनेट में रखा जाएगा । मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से भी इस संदर्भ में चर्चा हुई है। सरकार जिला परिषद कैडर के कर्मचारियों की जायज मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार करेगी । पंचायत सचिवों और अन्य कर्मचारियों को जिला परिषद में नियमित करने का फैसला पूर्व कांग्रेस सरकार ने लिया था ।

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