15 लाख का पैकेज छोड़ बना ऑनलाइन नशा करोबारी, छोड़ दी MNC की नौकरी, 5 राज्यों में सक्रिय

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शिमला – नितिश पठानियां

देश के लाखों युवा इंजीनियर बनने के लिए कई सालों तक रात-दिन मेहनत करते हैं और उसके बाद किसी प्रतिष्ठित MNC में नौकरी मिलती है। लेकिन हिमाचल में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक इंजीनियर को अमीर बनने का भूत इस कदर सवार हो गया कि उसने MNC में लाखों का पैकेज छोड़कर नशे का कारोबार शुरू कर दिया और कारोबार भी ऐसा कि पुलिस को लंबे समय तक चकमा देता रहा।

हिमाचल प्रदेश की शिमला पुलिस ने 16 जनवरी को पश्चिम बंगाल के एक नशा तस्कर संदीप शाह को गिरफ्तार किया। संदीप शाह गैंग के नाम से एक ऑनलाइन नशा तस्करी गैंग चला रहा था। पिछले चार वर्षों में यह गिरोह शिमला को केंद्र बनाकर उत्तर भारत में अपना नेटवर्क चला रहा था और हिमाचल के युवाओं को नशे का आदि बना रहा था। 26 और 27 जनवरी को पुलिस ने शाह गैंग से जुड़े 9 और ड्रग्स पेडलर्स को गिरफ्तार किया था।

पुलिस ने जब शाह गैंग के सरगना संदीप शाह से पूछताछ की तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। शाह पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर है और प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय कंपनी में काम करता था। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि शाह, जो सालाना 15 लाख रुपये के पैकेज पर काम करता था।

रातों-रात अमीर बनने के लालच में चिट्टा तस्करी के नेटवर्क का संचालन कर रहा था। शाह की तकनीकी विशेषज्ञता ने उसे पुलिस और आम जनता से बचने में मदद की। उसने डार्क वेब का इस्तेमाल कर उत्तर भारत के पांच राज्यों में नशे की तस्करी को अंजाम दिया।

डार्क वेब क्या है?

डार्क वेब इंटरनेट का वह हिस्सा है जिसे आप गूगल, याहू या बिंग जैसे सर्च इंजनों से एक्सेस नहीं कर सकते। इसे केवल स्पेशल ब्राउज़र के जरिए ही खोला जा सकता है। नशा तस्कर इसका उपयोग अवैध नशे के कारोबार के लिए करते हैं। डार्क वेब पर ई-कॉमर्स वेबसाइटों की तरह ऑनलाइन बाजार होते हैं, जहां ड्रग्स, हथियार और अन्य गैरकानूनी चीजें बेची जाती हैं।

संदीप शाह अपनी तस्करी को छिपाने के लिए ऑनलाइन पेमेंट और व्हाट्सएप लोकेशन शेयरिंग का इस्तेमाल करता था। वह सीधे तस्करों या खरीदारों से नहीं मिलता था। ग्राहक पहले से बताए गए खातों में ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करते, जिसके बाद उन्हें एक गोपनीय स्थान पर नशा लेने की सूचना दी जाती थी।

पुलिस को शक है कि शाह पाकिस्तान समेत विदेशों में सक्रिय चिट्टा तस्करों से जुड़ा हो सकता है। प्रारंभिक जांच के अनुसार, वह अब तक 25 से 30 करोड़ रुपये के नशे का कारोबार कर चुका है। पुलिस ने 400 बैंक खातों की पहचान की है, जिनका उपयोग इस अवैध धंधे में किया गया।

अधीक्षक संजीव कुमार गांधी के बोल

शिमला पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार गांधी ने बताया कि संदीप शाह का नेटवर्क अंतरराज्यीय स्तर पर फैला हुआ था। पुलिस इस मामले में गंभीरता से जांच कर रही है और अन्य संभावित आरोपियों को पकड़ने के लिए कार्रवाई जारी है। आम जनता से अपील की गई है कि वे नशे के कारोबार की जानकारी पुलिस को दें, ताकि इस जघन्य अपराध को जड़ से खत्म किया जा सके।

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