भरमौर में नाले पर बना अस्थायी पुल बहा, मंदिर से लौट रहे 20 श्रद्धालु फंसे; रेस्क्यू टीम रवाना

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चम्बा – भूषण गुरुंग

हिमाचल प्रदेश में मानसून की शुरुआती बारिश ने ही जनजीवन प्रभावित कर दिया है। भरमौर में नाले पर बनाया अस्थायी पुल तेज बहाव में बह गया। इस कारण बड़ग्रां पंचायत के करीब 20 श्रद्धालुओं का दल छड़ोले वाली माता मंदिर से वापसी के दौरान ल्यूंडी नामक स्थान पर नाले के पार फंस गया है।

बुधवार सुबह क्षेत्र में हुई भारी वर्षा के कारण ल्यूंडी नाले का जलस्तर बढ़ गया। इससे स्थानीय लोगों द्वारा बनाई गई अस्थायी पुलिया (तरंगड़ी) तेज बहाव में बह गई। पुलिया बहने से श्रद्धालुओं का संपर्क मुख्य मार्ग से कट गया। बड़ग्रां और बन्नी माता मंदिर से श्रद्धालुओं का यह दल रविवार को यात्रा पर निकला था।

भदरा गांव होते हुए श्रद्धालु छड़ोले वाली माता मंदिर पहुंचे थे। वहां वार्षिक पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करने के बाद जब दल लौट रहा था, तो ल्यूंडी नाले पर पहुंचने पर पाया कि पुलिया बह चुकी है। नाले में पानी का बहाव तेज होने के कारण श्रद्धालु दूसरी ओर फंस गए।

प्रशासनिक टीम रवाना

श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालने के लिए पंचायत का एक दल और प्रशासनिक टीम रवाना कर दी गई। यह संयुक्त दल भदरा गांव में रात बिताने के बाद वीरवार सुबह घटनास्थल की ओर गया। ल्यूंडी नामक यह स्थान भदरा गांव से लगभग 10 किलोमीटर दूर है और यहां तक का सफर बेहद दुर्गम और चुनौतीपूर्ण माना जाता है।

पिछले साल बहा था पुल, इस बार अस्थायी भी पानी में समाया

पंचायत बड़ग्रां के प्रधान अशोक कुमार ने बताया कि छड़ोले वाली माता मंदिर क्षेत्र के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। हर साल बड़ग्रां और तुदाह पंचायत के श्रद्धालु सामूहिक रूप से यहां पूजा के लिए आते हैं।

ल्यूंडी नाले पर पहले लकड़ी का एक मजबूत पुल था, जो पिछले वर्ष भारी वर्षा की भेंट चढ़ गया था। इसके बाद ग्रामीणों ने श्रमदान करके यह अस्थायी पुलिया तैयार की थी, जो इस बार की पहली भारी वर्षा नहीं झेल सकी।

पुल निर्माण की मांग

पंचायत प्रधान अशोक कुमार ने प्रशासन और सरकार से मांग की है कि ल्यूंडी नाले पर जल्द स्थायी पुल का निर्माण करवाया जाए। उन्होंने कहा कि इस मार्ग का उपयोग केवल श्रद्धालु ही नहीं बल्कि क्षेत्र के दर्जनों भेड़पालक भी अपने मवेशियों के साथ नियमित रूप से करते हैं।

हर पल रहता है खतरा

बरसात के मौसम में पुल न होने से स्थानीय लोगों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो जाती है और जान-माल का खतरा बना रहता है। फिलहाल, प्रशासन और स्थानीय लोग राहत एवं बचाव कार्य में जुट गए हैं।

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