हिम कुक्कुट पालन योजना अपना कर हेमा कुमारी ने चुना स्वरोजगार व आत्मनिर्भरता का रास्ता

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हिम कुक्कुट पालन योजना अपना कर गांव दुगराईं की हेमा कुमारी ने चुना स्वरोजगार व आत्मनिर्भरता का रास्ता

गोहर, 26 अगस्त – अजय सूर्या

प्रदेश सरकार की हिम कुक्कुट पालन योजना ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार का महत्वपूर्ण साधन बन रही है। इससे न केवल वे आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर बन रहे हैं, अपितु प्रोटीनयुक्त पौष्टिक आहार की जरूरतें भी पूरी कर पा रहे हैं।

ग्रामीण लोगों की आय बढ़ाने के दृष्टिगत पशुपालन के साथ मुर्गी पालन को जोड़ते हुए प्रदेश सरकार द्वारा हिम कुक्कट योजना प्रारंभ की गई है। योजना के तहत मुर्गी पालन पर कुल पूंजी निवेश का 60 प्रतिशत अनुदान सरकार की ओर से दिया जाता है और किसानों द्वारा सिर्फ 40 प्रतिशत ही खर्च किया जाता है ।

इस योजना के तहत सबसे पहले लाभार्थी किसान को सरकारी पोल्ट्री फार्म में लगभग 15 दिनों से एक महीने तक प्रशिक्षण करवाया जाता है। उसके उपरांत लाभार्थी किसान को मुर्गी के 3000 चूजे दिए जाते हैं। यह चूजे एक-एक हजार की तीन किस्तों में उपलब्ध करवाए जाते हैं।

गोहर उपमंडल के दुगराईं गांव की रहने वाली हेमा देवी ने इस योजना के तहत आत्मनिर्भरता की राह चुनी है। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित अवसरों के कारण वह भी अन्य लोगों की तरह पशुपालन और खेती-बाड़ी से जुड़े कार्य कर रही हैं।

वर्ष 2022-23 में पशुपालन विभाग के निर्देशन में उन्होंने सुंदरनगर के सरकारी पोल्ट्री फार्म में मुर्गी पालन पर 15 दिनों का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके उपरांत उन्होंने विभाग द्वारा निर्धारित मापदंडों के आधार पर कुक्कुट पालन योजना के लिए आवेदन किया। उन्होंने बताया कि जुलाई, 2024 में उन्हें विभाग द्वारा तीन हजार चूजों की पहली किस्त के तौर पर मुर्गी के एक हजार चूजे दिए गए।

लाभार्थी किसान को 88 हजार रुपए की राशि जमा करवाने पर उन्हें एक हजार मुर्गी चूजे के अतिरिक्त चूजों के आहार के लिए 60 फीड बैग, आहार भंडारण के लिए 30 फीडर तथा पानी भंडारण के लिए 30 ड्रिंकर विभाग के द्वारा उपलब्ध कराए गए। दूसरी तथा तीसरी किस्त में 81 हजार रुपए जमा करवाने पर लाभार्थी को विभाग द्वारा एक हज़ार मुर्गी चूजे तथा 60 फीड बैग प्रति किस्त उपलब्ध करवाए जाएंगे।

हेमा कुमारी का कहना है कि बाजार में चिकन की मांग अधिक होने पर उन्हें अच्छे दाम मिल जाते हैं तथा एक हजार मुर्गों पर 50 हज़ार रुपए से एक लाख रुपए तक अनुमानित लाभ अर्जित कर लेते हैं। उनका कहना है कि मुर्गी शैड के लिए भी सरकार की ओर से उन्हें एक लाख 60 हज़ार रुपए सब्सिडी प्रदान की जा रही है।

इस लाभकारी योजना के तहत प्रदत्त सुविधाओं के लिए उन्होंने सरकार का आभार व्यक्त किया। साथ ही स्थानीय ग्रामीणों से भी आग्रह किया है कि वे किसानों को आत्मनिर्भर व स्वावलंबी बनाने के लिए चलाई जा रही इन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अवश्य उठाएं।

पशु चिकित्सा अधिकारी गोहर डॉ. नवनीत चंदेल का कहना है कि हिम कुक्कट पालन योजना तहत उपमंडल में ऐसे किसानों को लाभान्वित किया जा रहा है जिनका प्राथमिक व्यवसाय कृषि व पशुपालन है। इससे किसानों को खेतीबाड़ी के साथ-साथ अतिरिक्त आय के बेहतर साधन उपलब्ध हुए हैं।

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