सेवानिवृत सैनिक के प्रयासों से मलपुर में तालाब का हुआ जीर्णोद्धार

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सेवानिवृत सैनिक के प्रयासों से मलपुर में तालाब का हुआ जीर्णोद्धार, सौंदर्यीकरण के मामले में तालाब ने पूरे हिमाचल में बनाई पहचान, ग्रामीण और निजी कंपनियों रखरखाव में दे रही सहयोग।

बद्दी/सोलन – रजनीश ठाकुर 

मलपुर गांव के सेवानिवृत कैप्टन डीआर चंदेल ने पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आए है। डीआर चंदेल ने गावं के प्राचीन तालाब का जीर्णोद्धार करके उसे नया रूप दिया है।

इस मामले में जहां उनका स्थानीय लोगों ने सहयोग किया वहीं इस गांव की दो बड़ी मल्टीनेशन कंपनियां भी तालाब के रखरखाव में उनका साथ दे रही है। वर्तमान में यह तालाब पूरे हिमाचल में अनपी सुंदरता के लिए अपनी पहचान बना चुका है।

वर्तमान में बीबीएन प्रदूषण के मामले में दूषित हो चुका है। नदी नाले पूरी तरह से दूषित हो गए है। किसी भी नदी नाले में मछलियां जीवित नहीं बची है। लेकिन मलपुर के तालाब में मछलियां आज भी जल क्रीड़ा करती है।

पिछले दस सालों से डीआर चंदेल इस प्राचीन सूखे हुए तालाब को सौंदर्यीकरण और जीर्णोद्धार में जुट गए। पहले इस तालाब से मिट्टी निकाली गई। इस काम के लिए उनके दामाद ने भी उनका सहयोग किया।

तालाब के लिए बीबीएनडीए ने भी सहयोग किया और 22 लाख रुपये दिए। जिससे इस तालाब को चारों ओर से पक्का किया गया। तालाब के चारों और फुटपाथ भी बनाया गया। सिपला कंपनी ने 15 लाख का सहयोग कर इस तालाब के लिए और चार चांद लगाए।

तालाब के चारो ओर फैंसिंग की और बैंच लगाए। शेड बनाए। पेड़ पौधे लगाए। वहीं ल्यूमिनस कंपनी ने भी पांच लाख का सहयोग किया। वर्तमान में यह तालाब किसी धार्मिक स्थल के कम नहीं है।

ग्रामीणओं के साथ-साथ बाहर के लोग भी पीपल की पूजा करने भी यहां पर आते है। बीबीएन में अब मछलियां नहीं रही है। लोग मछलियों को आटा देने के लिए बीस बीस किमी से इस तालाब में आते है।

डीआर चंदेल ने बताया कि तालाब बनने के बाद गांव का जल स्तर काफी ऊंचा हुआ है। गांव में जमीन में नमी आ गई है। गांव में दो ट्यूबवैलों का पानी का लेवल काफी ऊंचा हो गया है।

उन्होंने सेवाविृत के बाद गांव के लिए कुछ करने की सोची और आज यह तालाब पूरे हिमाचल में पहले नंबर पर है। सिपला फाऊंडेशन और ल्यूमीनस कंपनी निरंतर इसके रखरखाव में सहयोग कर रही है।

ल्यूमिनस कंपनी की ओर से गांव में मंदिर के साथ एक शेड भी बनाया गया है जहां पर स्थानीिय लोग भंडारा लगाते है।

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