सीपीआई (एम) कॉमरेड सीताराम येचुरी की स्मृति में शोक सभा आयोजित

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सीपीआई (एम) मंडी कॉमरेड सीताराम येचुरी की स्मृति में जोगिंदर नगर में आयोजित की शोक सभा

मंडी – अजय सूर्या

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की जोगिन्दर नगर लोकल कमेटी द्वारा आज जोगिन्दर नगर के किसान भवन में माकपा महासचिव कॉमरेड सीताराम येचुरी की स्मृति में एक शोक सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सबसे पहले बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्तओं और अन्य लोगों ने सीताराम येचुरी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इसके बाद सभी उपस्थित लोगों ने हॉल में खड़े होकर उनको याद याद करते हुए दो मिनट का मौन भी रखा।

12 सितंबर 2024 को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली में फेफड़ों के गंभीर संक्रमण से जूझने के बाद 72 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। शोक सभा को कुशाल भारद्वाज, संजय जमवाल, सुदर्शन वालिया, लक्की भारद्वाज, नौजवान सभा से रवि ठाकुर, एसएफआई से शिवालिका ठाकुर, किसान सभा से मोहन सरवाल, केहर सिंह, भगत राम आदि ने भी संबोधित किया तथा देश की राजनीति के साथ-साथ छात्र आंदोलन एवं मजदूर किसान आंदोलन में उनके योगदान को याद किया।

शोक सभा में उपस्थित समूह को संबोधित करते हुए मंडी सीपीआई(एम) के राज्य सचिवालय सदस्य एवं जिला कमेटी के सचिव कुशाल भारद्वाज ने कहा कि कॉमरेड सीताराम येचुरी भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के शीर्ष नेता, वामपंथी आंदोलन के एक उत्कृष्ट नेता और एक प्रसिद्ध मार्क्सवादी विचारक थे।

वे पार्टी के अंदर तो लोकप्रिय थे ही लेकिन साथ ही अपनी सादगी, अपने कार्यों, अपनी ईमानदारी, अपनी स्पष्टवादिता, अपने मिलनसार स्वभाव और मजदूर वर्ग एवं देश के प्रति समर्पित जीवन के कारण वे देश भर में लोकप्रिय थे और अन्य पार्टियों के लोग भी उनको बहुत सम्मान देते थे। वे मार्कस्वाद लेनिनवाद के सिद्धांतों के अनुरूप भारत में जनता की जनवादी क्रांति के माध्यम से शोषण मुक्त समाजवादी समाज स्थापित करना चाहते थे।

वे भारत की वामपंथी राजनीति का एक प्रमुख चेहरा थे। वे बहुत ही प्रतिभाशाली छात्र थे। उन्होंने हायर सेकेन्डरी की सीबीएसई परीक्षा में ऑल इंडिया टॉप किया था और उसके बाद दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से अर्थशास्त्र (ऑनर्स) में ग्रेजुएशन में टॉप रैंकिंग के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया था। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) अर्थशास्त्र से स्नातकोतर की। अर्थशास्त्र में स्नातक और स्नातकोत्तर दोनों ही डिग्री में प्रथम श्रेणी हासिल की थी।

फिर जेएनयू में ही पीएचडी में दाखिला लिया, लेकिन 1975 में आपातकाल के खिलाफ आवाज उठाने के चलते उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया जिस कारण के कारण वे पीएचडी पूरी नहीं कर सके। वे तीन बार जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए तथा छत्र संगठन एसएफ़आई के के अखिल भारतीय अध्यक्ष रहते हुए इस संगठन को अखिल भारतीय ताकत के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वे 1975 में सीपीआई(एम) में शामिल हुए। 1985 में उन्हें पार्टी की केंद्रीय समिति के लिए चुना गया, 1989 में उन्हें केंद्रीय सचिवालय और 1992 में पार्टी की 14वीं कांग्रेस में पोलित ब्यूरो के लिए चुना गया। 2015 में 21वीं कांग्रेस में उन्हें सीपीआई(एम) का महासचिव चुना गया और अपनी मृत्यु के समय भी वे पार्टी के महासचिव थे।

तीन दशकों से अधिक समय तक पार्टी केंद्र में नेतृत्व टीम के हिस्से के रूप में, उन्होंने समय-समय पर पार्टी की राजनीतिक स्थिति तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विचारधारा के क्षेत्र में कॉमरेड सीताराम ने एक विशिष्ट भूमिका निभाई।

वे 2005 से 2017 तक दो बार राज्यसभा के सदस्य रहे। वे सीपीआई(एम) समूह के नेता थे और एक प्रभावी सांसद थे। उन्हें 2017 में सर्वश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार दिया गया था। वे एक भूत ही विपुल लेखक भी थे तथा उन्होंने कई किताबें और अनगिनत लेख लिखे हैं।

वे देश के संविधान, धर्मनिरपेक्षता और लोकतन्त्र की रक्षा के अगुआ थे। बहुत सी राजनीतिक पार्टियों के नेता कई मुद्दों पर अकसर उनसे सलाह लेते थे। उनका सरल, सौम्य और मिलनसार स्वभाव हर किसी को आसानी से उनके करीब ले आता है। वे एक ऐसे नेता थे जिनके समक्ष कोई भी खुलकर अपनी बात रख सकता था। वे समकालीन राजनीति के सबसे सम्मानित नेताओं में से एक थे।

कुशाल भारद्वाज ने कहा कि हमारी राष्ट्रीय राजनीति के इस महत्वपूर्ण मोड़ पर सीताराम येचुरी का असामयिक निधन सीपीआई(एम) के लिए एक बड़ा झटका है और वामपंथी, लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष ताकतों के लिए एक गंभीर क्षति है। उन्होंने सभी पार्टी कार्यकर्ताओं से आह्वान है कि वे एकजुट होकर शोषण मुक्त समाज के लिए संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए कड़ी मेहनत करें। यही कॉमरेड सीताराम येचुरी को दी जाने वाली सबसे बेहतर श्रद्धांजलि होगी।

इस अवसर पर माकपा की जोगिन्दर नगर लोकल कमेटी के सदस्य संजय जमवाल ने कहा कि हाल के दिनों में सीताराम येचुरी ने अपना बहुत सारा समय और ऊर्जा धर्मनिरपेक्ष विपक्षी दलों की व्यापक एकता बनाने में लगाई, जिसने इंडिया ब्लॉक का रूप ले लिया। संयुक्त मोर्चा सरकार और बाद यूपीए सरकार दोनों के दौर में सीताराम सीपीआई(एम) के प्रमुख मध्यस्थों में से एक थे, जो इन गठबंधनों का समर्थन कर रहे थे।

इस अवसर पर कुछ और पार्टियों के लोग भी शामिल हुए तथा कांग्रेस पार्टी के जिला उपाध्यक्ष गुरुशरण परमार ने भी अपनी पार्टी की तरफ से सीताराम येचुरी को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि सीताराम येचुरी के निधन से पूरे देश की राजनीति में जो शून्य पैदा हुआ है उसकी भरपाई करना मुश्किल है।

उन्होंने हमेशा सिद्धांतों की राजनीति की तथा समाज के कमजोर लोगों की आवाज उठाई। देश ने एक सच्चा देशभक्त नेता और धर्मनिरपेक्षता व लोकतंत्र का प्रहरी को दिया है। उन्होंने माकपा के सभी कार्यकर्ताओं के साथ अपनी हमदर्दी भी जाहिर की।

इस शोक सभा के मौके पर एक शोक प्रस्ताव पारित कर कॉमरेड सीताराम येचुरी की पत्नी सीमा, उनकी बेटी अखिला, बेटे दानिश, भाई शंकर और परिवार के अन्य सदस्यों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की गई।

ये रहे उपस्थित

इस शोक सभा में कुशाल भारद्वाज, संजय जमवाल, केहर सिंह वर्मा, भगत राम, कृष्ण चंद, मोहन सरवाल, सुदर्शन वालिया, रमेश चंद, रूप सिंह, शिवालिका ठाकुर, मोहित, आकांक्षा, पवन कुमार, लक्की भारद्वाज, रवि ठाकुर तथा एसएफआई, डीवाईफआई, किसान सभा के कार्यकर्ताओं ने भी हिस्सा लिया।

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