श्री बज्रेश्वरी देवी मंदिर में घृत मंडल की तैयारियां शुरू, तीन क्विंटल मक्खन तैयार

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कांगड़ा- राजीव जसबाल 

श्री बज्रेश्वरी देवी मंदिर में घृत पर्व के आयोजन को लेकर जहां मंदिर में देसी घी से मक्खन बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस एतिहासिक प्रक्रिया के लिए श्रद्धालुओं द्वारा देसी घी का दान में देने का सिलसिला शुरू हो गया है। मक्खन बनाने में जुटे मंदिर के पुजारियों की ओर से पहले दिन 3 क्विंटल मक्खन तैयार कर लिया है।

देसी घी से मक्खन बनाने की परंपरा को सोमवार पूरे रीति रिवाज से शुरू किया गया। जिसके लिए लगभग 12 पुजारियों का दल इस महा अभियान में जुटा है। मंदिर के पुजारियों ने श्रद्धालुओं से भी अपील जारी कर दी है कि देसी घी दान देने वाले श्रद्धालु 10 जनवरी तक देसी घी मंदिर कार्यालय में जमा करवा दें।

वरिष्ठ पुजारी पंडित निशांत शर्मा ने बताया कि देसी घी दान देने वाले श्रद्धालुओं की कमी नहीं है, परंतु कई श्रद्धालु देसी घी अंतिम दिनों 12 व 13 जनवरी को देसी घी दान देने पहुंचते है, जिसका प्रयोग मक्खन बनाने में नही हो पाता है। इस कार्य में श्रद्धालुओं की भागीदारी में हर वर्ष इजाफा हो रहा है और ऐसे में कई शताब्दी वर्ष पुरानी परंपरा में हर वर्ष देसी घी दान देने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है।

रविवार को भी इसी परंपरा को शुरू करने से पहले मंदिर के पुजारियों ने देसी घी से मक्खन तैयार करने के प्रयोग में लाये जाने वाले बर्तनों की साफ सफाई कर एकत्रित कर लिया है जिसे सोमवार सुबह मंदिर के पुजारी इस परंपरा को पूरे रीति रिवाज के साथ शुरू मक्खन बनाने क कार्य शुरू कर दिया।

हालांकि अभी तक लगभग पांच क्विंटल देसी घी कांगड़ा मंदिर प्रशासन के पास पहुंच चुका है और लगभग 20 क्विंटल देसी घी आने की संभावना मंदिर प्रशासन व पुजारियों को है। मंदिर अधिकारी दलजीत शर्मा ने बताया कि मक्खन बनाने का कार्य सोमवार को मंदिर के पुजारियों द्वारा शुरू कर दिया है। उन्होने बताया कि मंदिर प्रशासन द्वारा इस कार्य में अपना पूरा सहयोग पुजारियों को देगा।

बह्मचारी परंपरा के तहत होता है मक्खन बनाने का कार्य 

घृत पर्व के लिए मक्खन बनाने का कार्य आसान कार्य नही है बल्कि इस कार्य में जुटे मंदिर के पुजारियों को पूरे ब्रहमचारी पंरपरा के तहत मक्खन बनाने का कार्य करना पड़ता है। मंदिर के वरिष्ठ पुजारी पंडित निशांत शर्मा ने बताया कि मक्खन बनाने की प्रक्रिया के दौरान इस कार्य में जुटे मंदिर के पुजारियों को मक्खन बनाने से मक्खने चढ़ाने तक एक ब्रहमचारी परंपरा का पूरा पालन करना पड़ता है। पुजारी वर्ग को इन दिनों तक सबसे पहले अपने नाखुन काटने पड़ते है व ब्रहमचारी के तहत इस महान कार्य को पूरा करना पड़ता है।

मक्खन बनाने में जुटे युवा पुजारी

मक्खन बनाने के लिए इस बार भी मंदिर के युवा पुजारियों को जिम्मा दिया गया है। इस परंपरा की महत्वता बनी रहे तो इसके लिए भी मंदिर के वरिष्ठ पुजारियों की देख रेख में युवा पुजारी मक्खन बनाने का कार्य करेगें।

मक्खन बनाने में पंडित समवेद शर्मा, निशान्त शर्मा, नितिन शर्मा, सदन शर्मा, शिवनंदन, अजय शर्मा, आशीष शर्मा, राघव शर्मा, आयुष शर्मा, अंशुल शर्मा, चक्षु शर्मा, दिवाकर अवस्थी, तरु ष शर्मा, मनमोहन शर्मा, सचिन शर्मा व रितिक शर्मा जुटे है।

चंडीगढ़ के श्रद्धालु ने दान में दिये 101 देसी घी के टीन

मंदिर के पुजारी पंडित निशांत शर्मा ने बताया कि चंडीगढ़ के श्रद्धालु ने घृत पर्व के लिए तैयारी होने वाले मक्खन के लिए 101 देसी घी के टीन दान में दिये है। उन्होने बताया कि इसी श्रद्धालु द्वारा माता का मुख्य सिहांसन सोने से तैयार करवाया है।

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