शांति-निवास ठम्बा में आयोजित में श्रीमद्भागवत कथा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव

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शाहपुर – नितिश पठानियां 

शांति-निवास ठम्बा” में द्रोणाचार्य महाविद्यालय के संस्थापक गन्धर्व सिंह पठानिया व बलविंदर सिंह पठानिया द्वारा आयोजित श्रीमद भागवत कथा के चतुर्थ-दिवस में कथा-वाचक पं बद्री प्रसाद शास्त्री ने कथा का शुभारंभ करते हुए कहा कि भारत संत-महात्माओं की सत्कर्म-भूमि है।

हिंसा और आतंकबाद से घिरी दुनियाँ में अमन-चेन लाने के लिए अहिंसक शक्तियों को आगे आना होगा। रोटी, कपड़ा और मकान की चिंता के साथ अपने धर्म को मजबूत कीजिए क्योंकि जहाँ धर्म कमजोर होता है वहाँ रोटी छीन ली जाती है कपड़े उतार लिए जाते हैं और मशाल जला दिए जाते हैं।

समाज भौतिक विज्ञान से नहीं आध्यत्म-विज्ञान से जुड़े तो सुखी हो सकता है। रोते- रोते पैदा होना दुर्भाग्य नहीं, रोते-रोते जीना और रोते-रोते मर जाना दुर्भाग्य है।

शास्त्री जी कहा कि मनुष्य में पशुता और दिब्यता ये दो शक्तियों निवास करती है, उपर उठे सत्कर्म करे तो देवता हो सकता है और नीचे गिरे तो पशु हो सकता है।

मनुष्य जीवन का एक पड़ाव है इससे जीव का उत्थान भी हो सकता है और पतन भी। दुनियाँ में कोई भी संतुष्ट नहीं है। गरीव अमीर होना चाहाता है, अमीर और अमीर और सुंदर होना चहाता है।

इसका कारण इतना ही है कि यहाँ कोई अपने होने जैसे में राजी नहीं है हर एक आदनी दूसरे जैसा होना चहाता है जबकि सुखी होने का फार्मूला है तुम अपने होने राजी हो जाओ।

शास्त्री जी ने कहा कि जमाना मैचिंग का चल रहा है मैचिंग होना चाहिए लेकिन वस्त्रों और आभूषणों के साथ- साव सराभाव का भी तालमेल होना चाहिए जिस व्यक्ति का स्वभाव ठीक नहीं होता वह सुखी नहीं हो सकता।

फैशन के चेतुके दौर में अपनी संस्कृक्ति, सभ्यता. मानवता और मर्यादा को न भूलें। समाज से गंदगी जिस तरीके से भी साफ हो जाए वही धर्म बन जाता है, तरीके ही ढूंढते रहोगे ती गंदगी साफ यही होगी।

तरीका तो बाली को मारने का भी गलत था, तरीका भीष्म को मारने का भी गलत था, तरीका तो द्रोण मारने का भी गलत था, तरीका कर्ण को मारने का भी गलत था, तरीका दुर्योधन को मारने का भी गलत था लेकिन जो गलत तरीके से मारे गए वो भले ही गलत न रहे हो पर गलत आदमी का साथ देने वाला भी गलत ही है।

आज के वातावरण में इस विषय पर चिंतन जरुरी है। स्वच्छ सनातन राष्ट्र-धर्म रक्षा के लिए गंदगी साफ करने का जो भी तारीक हो वही धर्म बन जाता है। धर्म स्थापना के लिए भारत भूमि में ही भगवान के अवतार होते हैं।

भारत भूमि ही कर्म भूमि है बाकी सब भोग भूमि है। सम्पूर्ण ब्रह्मांड भगवान का है लेकिन भारत भगवान का धर्म-हृदयस्थल है।

जैसी शरीर का कोई अंग रोगग्रस्त होने पर कटवा दिया जाता है और जीवन फिर भी चल जाता है लेकिन हृदय की गति रुक गई तो स्वस्थ शरीर भी किसी काम का नहीं रहता। ठीक इसी तरह भारत में धर्म की रक्षा हो गई तो विश्व में धर्म कि रक्षा हो जायेगी ।

ये रहे उपस्थित 

इस पावन शुभ अवसर पर यजमान पठानिया परिवार द्वारा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की भब्य झांकी निकाली गई जिससे ठम्बा, दुरगेला, बसनूर, रैत, रेहलु, पलवाला, शाहपुर के सैकड़ों सनातनी गणमान्य ग्राम, नगर एवं क्षेत्रवासी कथा-रशिकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कर पुण्यलाभ अर्जित किया ।

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