वन विभाग की कार्यवाही के खिलाफ 150 लोगों ने किया विरोध, प्रदेश सरकार के खिलाफ रमेश धवाला ने भरी हुंकार, पोंग बांध विस्थापितों के हक में हुए खड़े

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वन विभाग की कार्यवाही के खिलाफ 150 लोगों ने किया विरोध, रमेश धवाला बोले दोबारा क्यों उजाड़ा जा रहा पोंग बांध विस्थापितों को, प्रदेश सरकार के खिलाफ रमेश धवाला ने भरी हुंकार, पोंग बांध विस्थापितों के हक में हुए खड़े

देहरा – शिव गुलेरिया 

बीजेपी के बड़े नेता और पूर्व में मंत्री रहे रमेश धवाला ने प्रदेश की सुक्खू सरकार को पोंग बांध विस्थापितों के हकों को लेकर जमकर घेरा।

धवाला ने कहा कि वर्ष 1972 में पोंग बांध के निर्माण से हुए विस्थापन के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कहने पर हजारों लोग खाली पड़ी जमीन पर बस गए। लेकिन बाद में बंदोवस्त में हुई गलती के कारण उनकी जमीन वन भूमि में तब्दील हो गई।

देहरा में ऐसे लगभग 600 परिवार हैं। जिन्हें अब दूसरी बार उजड़ने का डर सता रहा है। अब वन विभाग कि जमीन पर जिन लोगों के घर हैं उन्हें वन विभाग ने नोटिस देना शुरू कर दिया है। इससे पहले भी वन विभाग ने दो गरीब परिवारों के घरों पर बुलडोजर चलाया था।

अब 21 घरों को वन विभाग से नोटिस मिलने के बाद गुलेर में बीजेपी के पूर्व मंत्री रमेश धवाला की अगुवाई में लगभग 150 लोग इक्कठे हो गए। जिन 21 घरों को तोड़ने का नोटिस जारी किया गया है उनमें से एक घर में बेटी की शादी भी है। उस परिवार ने वन विभाग से शादी होने तक की अनुमति मांगी है।

दरअसल इन पोंग बांध विस्थापितों ने विस्थापन के बाद जहां भूमि मिली वहां अपने नए घर बना लिए। 1972 में बने पोंग बांध के निर्माण के कारण लगभग 25,000 लोगों को विस्थापित होना पड़ा था।

इस बांध का नाम महाराणा प्रताप सागर पोंग बांध है। इसका निर्माण 1964 में शुरू हुआ और 1973 में बनकर पूरा हुआ व जलभराव हुआ। हाल ही में, वन विभाग ने इन विस्थापितों को नोटिस जारी किया है कि वे इस भूमि को खाली कर दें।

वन विभाग का कहना है कि यह भूमि वन भूमि है और इस पर कोई निर्माण नहीं किया जा सकता है। इस नोटिस के विरोध में पोंग बांध विस्थापितों ने प्रदर्शन किया है। उन्होंने मांग की है कि उन्हें इस भूमि पर रहने की अनुमति दी जाए।

इस मामले में, रमेश धवाला ने विस्थापितों के समर्थन में आवाज उठाई है। उन्होंने कहा कि सरकार को इन विस्थापितों के साथ न्याय करना चाहिए।

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