बाथू दी लड़ी निहारने पहुंच रहे बाहरी राज्यों के सैलानी

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ज्वाली – माध्वी पंडित

पौंग झील के मध्य में स्थित पांडवों द्वारा अज्ञातवास के दौरान निर्मित बाथू दी लड़ी के दीदार को प्रतिदिन काफी संख्या में पर्यटकों का आगमन शुरू हो गया है। इस ऐतिहासिक स्थल पर पांडवों द्वारा सात छोटे- छोटे मंदिर, एक सीढ़ीनुमा गोलाकार लड़ी निर्मित की गई है।

हिमाचल के अलावा बाहरी राज्यों पंजाब, चंडीगढ़, अमृतसर, लुधियाना सहित बाहरी देशों से पर्यटक आ रहे हैं। चारों तरफ पानी होने के कारण पर्यटक किश्तियों के माध्यम से उक्त स्थल तक पहुंच रहे हैं। गोलाकार सीढ़ीनुमा लड़ी में कई जगहों पर बैठने के लिए झरोखे निर्मित किए गए हैं।

पर्यटक इन सीढिय़ों के माध्यम से इसके अंत तक घूम आते हैं। यह मंदिर जुलाई माह में पौंग झील का जलस्तर बढऩे के कारण पानी में समा जाता है। जनवरी माह में पौंग झील का जलस्तर कम होने पर पौंग झील से बाहर निकलना शुरू हो जाता है।

अप्रैल माह तक यह मंदिर बिल्कुल पानी से बाहर आ जाता है। यह मंदिर ऊंचे टापू पर होने के मार्च माह में बाहर आ जाता है लेकिन इसके चारों तरफ पानी होता है । जिस कारण मार्च माह में लोग किश्तियों के माध्यम से इस स्थल में पहुंचते हैं तथा अप्रैल से लेकर जुलाई माह तक बिल्कुल खाली होता है तथा इस दौरान पर्यटक अपने दोपहिया व चौपहिया वाहनों के माध्यम से उक्त स्थल तक पहुंचते हैं।

मौजूदा समय में रोजाना सैंकड़ों के हिसाब से हिमाचल के अलावा बाहरी राज्यों से पर्यटक पहुंच रहे हैं। पौंग झील के मध्य स्थित इस मंदिर को गायब होने वाला मंदिर भी कहा जाता है। यह मंदिर पौंग झील का जलस्तर बढऩे के साथ ही झील के पानी में समा जाता है और जब जलस्तर कम होता है तो 6 माह के बाद पानी से बाहर आ जाता है।

देखने की बात तो यह है कि पानी के अंदर रहने के बाद भी इस मंदिर की नक्काशी सहित कला को कोई फर्क नहीं पड़ता है। इस स्थल पर कई छोटे.बड़े मंदिर निर्मित हैं। इस मंदिर को देखने के लिए आने वाले पर्यटकों की साल दर साल बढ़ती ही जा रही है। पहले इस मंदिर को देखने के लिए कोई नहीं आता था लेकिन पिछले तीन-चार सालों से यह मंदिर काफी प्रसिद्ध हुआ है जिसको दूरदराज से पर्यटक देखने के लिए आते हैं।

गत वर्ष उक्त स्थल पर वन्य प्राणी विभाग द्वारा पर्यटकों को पौंग झील का नजारा दिखाने के लिए मोटरवोट भी लगाई गई थी जिसका काफी पर्यटकों ने आनंद लिया था परन्तु इस बार अभी तक वन्य प्राणी विभाग द्वारा मोटरवोट भी नहीं लगाई गई है। मोटरवोट न होने के कारण पर्यटक पौंग झील का नजारा देखने से वंचित रह रहे हैं। मंदिर के पास अभी तक प्रशासन द्वारा पुख्ता प्रबंध नहीं किए गए हैं।

क्षेत्र के बुद्धिजीवियों के बोल

बुद्धिजीवियों ने कहा कि मंदिर में प्रशासन द्वारा एक पुजारी बैठाया जाए तथा चढ़ावे की रकम को गौ सेवा या मंदिर की मरम्मत में लगवाया जाए ताकि इस पैसे का सदुपयोग हो सके।

क्या कहते हैं जिलाधीश डॉ निपुण जिंदल

जिलाधीश कांगड़ा डॉ निपुण जिंदल ने कहा कि एसडीएम ज्वाली सहित पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि स्थल पर सुरक्षा के लिहाज से पुख्ता प्रबंध किए जाएं। उन्होंने कहा कि किसी को भी पानी में नहाने न दिया जाए तथा अगर कोई नहाता पाया जाता है तो उसके खिलाफ केस दर्ज किया जाए। उन्होंने वन्य प्राणी विभाग को भी सुरक्षा के इंतजाम करने के निर्देश दिए जाएंगे।

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