प्रदेश हित में विधायकों के वेतन भत्तों को लिया जाए आय-कर के दायरे में

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कोटला- स्वयम

पूर्व पंचायत समिति सदस्य एवं वर्तमान उपप्रधान पंचायत डोल भटहेड़ साधू राम राणा ने प्रेस वार्ता में कहा कि हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति दिन प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है और प्रदेश पर कर्ज का बोझ बढ़ता ही जा रहा है।

लेकिन इस बिगड़ती वित्तीय स्थिति को सुधारने वाले हमारे वेतन भोगी समाजसेवी विधायक एक तो सरकारी खजाने से अथाह वेतन-भत्तों एवं पैंशन प्राप्त करने में अपना गौरव समझते हैं और इन अथाह वेतन-भत्तों एवं पैंशन पर मिलने वाली धनराशि पर लगने वाला आय-कर का भुगतान सरकारी खजाने से ही करते हैं।

जबकि कर्मचारियों को पुरानी पैंशन बहाली एवं विकास कार्यों में आय के कम संसाधनों का हवाला देकर पैसों की कमी की बात कही जाती है। क्या हमारे समाजसेवी जनता को यह बताने की जुर्रत करेंगे कि विधायकों को जो हर महीने करोड़ों रुपए वेतन भत्तों एवं पैंशन के रूप में बिना आय-कर के दिए जा रहे हैं बह कौन से संसाधनों से जुटाए जा रहे हैं।

अतः जनता की कमाई से की जा रही लुट को तुरंत प्रभाव से रोकते हुए कर्मचारियों को पुरानी पैंशन बहाली एवं अन्य विकास कार्यों पर खर्च करने पर इस धनराशि को समायोजित किया जाए ताकि निस्वार्थ भाव से राजनीति करने की शुरुआत की जा सके।

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