पौंग झील में मत्स्य आखेट पर प्रतिबंध से मछुआरों को रोजी-रोटी के पड़े लाले।

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जवाली, माधवी पण्डित

बर्ड फ्लू से प्रवासी पक्षियों की मौत होने के कारण पौंग झील में मत्स्य आखेट पर एकदम से प्रतिबंध लगा देने के चलते मछुआरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मछुआरों को रोजी-रोटी के लाले पड़ गए हैं तथा अपने व्यवसाय को छोड़कर मछुआरों को दिहाड़ी लगाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

मछुआरों के घर का चूल्हा बड़ी मुश्किल से जल पा रहा है। मछुआरों विजय कुमार, सतपाल, राजिन्दर काका, कृष्ण कुमार, अशोक कुमार, संजय कुमार, संदीप कुमार, संजीव कुमार, कर्म चन्द, तन्नू राम, वीर सिंह, अशवनी कुमार, मनोज कुमार, सुभाष चन्द, राकेश कुमार, इन्द्रपाल, नरेश कुमार इत्यादि ने कहा कि पौंग झील में एकदम से मत्स्य आखेट पर प्रतिबंध लगाने से उनके जाल पानी में ही रह गए हैं तथा किश्तियाँ भी सूखी जगह पर पड़ी हुई हैं।

सूखी जगह पर किश्तियों के पड़े होने से उन्हें दीमक लग जाएगी तथा मछुआरों का हजारों रुपए का नुकसान हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पौंग झील में मछली पकड़ने का कार्य करने से ही उनके परिवार का पालन-पोषण होता है लेकिन अब झील में जाने पर पाबंदी लगा दी गई है तथा घर का खर्च करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि करीबन 2200 मछुआरे मछली पकड़ने का कार्य करके आजीविका कमाते हैं लेकिन अब उनको घर का खर्च उठाना मुश्किल हो गया है।

उन्होंने कहा कि अगर बर्ड फ्लू के चलते सरकार ने मछली पकड़ने हेतु जाने वाले मछुआरों पर पाबंदी लगानी थी तो उस हिसाब से मछुआरों के लिए कोई राहत राशि भी दी जानी चाहिए थी लेकिन सरकार व मत्स्य विभाग ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने कहा कि कम से झील में लगे जालों को निकालने दिया जाए व किश्तियों को भी पानी में पहुंचाने दिया जाए। मछुआरों ने प्रदेश सरकार व मत्स्य विभाग से मांग उठाई है कि मछुआरों को राहत राशि प्रदान की जाए ताकि परिवार का पालन-पोषण कर सकें।

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