परिवार व BSF ने मान लिया था मृत: पठानकोट से बच्चे की किडनैपिंग का मास्टरमाइंड बना आदतन अपराधी

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नूरपुर – स्वर्ण राणा

हिमाचल-पंजाब सीमा पर पठानकोट से मासूम बच्चे की किडनैपिंग के हाई प्रोफाइल मामले का मास्टरमाइंड अमित राणा क्या अब आदतन अपराधी बन चुका है। ये सवाल इस वजह से पैदा हो रहा है क्योंकि एक साल के भीतर ही अमित ने संगीन अपराध को अंजाम दिया।

ये अलग बात है कि दोनों ही संगीन वारदातों में सीमा सुरक्षा बल का जवान अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाया। अमित द्वारा लिखी गई दूसरे संगीन अपराध की पटकथा के बाद ये भी प्रश्न उठ रहा है की क्या ऑनलाइन गेमिंग की लत ने एक बीएसएफ के जवान को अपराध की दुनिया में कदम रखने पर मजबूर कर दिया।

किडनेपिंग का मास्टर माइंड यह वही अमित राणा है, जिसने कुछ समय पहले लोन से बचने के लिए अपनी मौत का नाटक किया था, लेकिन पुलिस की पैनी नजर से बच नहीं पाया था। सड़क हादसे में उसकी मौत के बाद बीएसएफ ने उसे सलामी भी दी थी, लेकिन जब उसके जीवित होने का सनसनीखेज खुलासा हुआ तो उसे बीएसएफ से बर्खास्त कर दिया गया था।

जानकारी के अनुसार,अमित ने उत्तराखंड में भी आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया है।32 साल का अमित राणा कांगड़ा जिले के नूरपुर का निवासी है। उसे बेंगलुरु से चेन्नई जाते समय एक दोस्त के ट्रक में पकड़ा गया था। 29 जून 2023 को उसकी जली हुई कार चंबा-चौरी रोड पर जोत के पास मिली थी, जिसमें हड्डियां पाई गई थीं।

शुरुआत में माना गया था कि कार इंजन ओवरहीटिंग के कारण आग की चपेट में आ गई और राणा की जलकर मौत हो गई। परिवार ने अंतिम संस्कार भी कर दिया था, लेकिन परिवार को हमेशा शक था कि यह हादसा नहीं, बल्कि हत्या है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए धारा 174 के तहत कार्रवाई शुरू की थी।

पुलिस को शक हुआ कि यह हादसा नहीं, बल्कि एक साजिश थी। घटनास्थल पर मिले सबूतों से मौत पर संदेह हुआ। पुलिस ने जब सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो राणा को चंबा बस स्टैंड पर देखा गया। पुलिस ने राणा के दोस्तों और कॉल डिटेल रिपोर्ट की गहन जांच की, जिससे पता चला कि वह अपने ट्रक ड्राइवर दोस्त के साथ दक्षिण भारत में छिपा हुआ है।

पुलिस ने बेंगलुरु में एक टीम भेजी और राणा को तब पकड़ा, जब वह अपने दोस्त के साथ चेन्नई जा रहा था। पूछताछ में राणा ने कबूल किया कि वह करीब 40-45 लाख रुपये के कर्ज के कारण आर्थिक संकट में था और ऑनलाइन गेमिंग की लत ने उसकी मुश्किलें बढ़ा दी थीं। उसने कहीं से हड्डियां जुटाकर अपनी कार में रख दीं और फिर कार को एक सुनसान इलाके में आग के हवाले कर दिया।

इस घटना के बाद राणा को बीएसएफ ने नौकरी से बर्खास्त कर दिया। मामले में पुलिस ने पाया कि घटना में कोई अन्य व्यक्ति या राणा के परिवार के सदस्य शामिल नहीं थे। हालांकि, किडनैपिंग के मामले में राणा के खिलाफ पुलिस का शिकंजा कसता जा रहा है और संदेह है कि उसने अपने अपराधों को अंजाम देने के लिए एक गिरोह बना लिया है।

वहीं पुलिस ने यह भी कहा कि किडनैपिंग के लिए बाकायदा विस्तृत योजना बनाई गई थी, जिसमें रेकी भी की गई थी। चूंकि इस मामले में पुलिस को एक से अधिक लोगों की संलिप्तता नजर आ रही है, इसलिए यह भी माना जा रहा है कि राणा ने संगठित तरीके से अपराध को अंजाम देने के लिए गिरोह बना लिया है।

इस बीच, नूरपुर पुलिस ने अमित के साथ शामिल एक अन्य आरोपी सोनी से जुड़ी जानकारी को नूरपुर पुलिस ने पठानकोट पुलिस के साथ साझा किया है। यह भी जानकारी मिली है कि नूरपुर इलाके से सम्पत्ति बेचने के बाद अमित का परिवार योल कैंट में बस चुका है।

उधर,नूरपुर के पुलिस अधीक्षक अशोक रतन ने पुष्टि की है कि यह वही अमित राणा है, जिसने पिछले साल अपनी मौत का ड्रामा किया था। एसपी के अनुसार, किडनैपिंग के मामले में पठानकोट पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है और सहयोग प्रदान किया जा रहा है। एक सवाल के जवाब में एसपी ने माना कि एक समय देश की सेवा के लिए तत्पर रहने वाला इस समय शातिर अपराधी बन चुका है।

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