पंचायतीराज व्यवस्था की कई सालों से राह देख रहे योल के लोग

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धर्मशाला – राजीव जस्वाल

पिछले कई सालों से योल के लोग पंचायती राज में शामिल होने के लिए तरस रहे हैं। कई सरकारें, आई गईं। लेकिन आज तक योल के लोगों को सुख की छांव नसीब नहीं हुई।

वर्ष 2003 के दौरान गृह कर की भारी भरकम बढ़ोतरी के कारण तथा मूलभूत सुविधाओं के न मिलने से ग्राम पंचायत निर्माण सुधार संघर्ष समिति कैंट बोर्ड प्रशासन के खिलाफ लामबंद हुई और परिषद के अधीन आने वाले सात वार्डों को पंचायती राज में विलय करने की आवाज़ बुलंद की ओर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

2008 के दौरान समिति के हक में फैसला भी हुआ। मामला केंद्रीय रक्षा मंत्रालय और हिमाचल प्रदेश सरकार के बीच होने के कारण अभी तक कोई स्थायी ‌‌हल नहीं निकला। हालांकि 2013 के दौरान संघर्ष समिति ने बोर्ड चुनाव का बहिष्कार किया।

जिसका नतीजा यह रहा कि आज तक बोर्ड का चुनाव नहीं हो पाया और बोर्ड ही कार्य चला रहा है। बहरहाल अब विधानसभा चुनावों को कुछ दिन रह गए हैं। संघर्ष समिति ने टूक कह दिया है कि वोट उसको जो‌ योल के लिए पंचायती राज की पैरवी करे।

यह परेशानियां झेल रहे लोग

-भारी भरकम गृह कर बढ़ोतरी से लोग पिस रहे हैं

-सरकार द्वारा संचालित महत्वपूर्ण योजनाओं का नही मिलता लाभ।

-अपनी मलकीयत जमीन पर भी भवन तथा अन्य मरम्मत के लिए लेनी पड़ती अनुमति ।

– अधिकतर आबादी किसान तबके की होने से रहते सरकारी योजनाओं से वंचित

-सैन्य क्षेत्र से गुजरने के लिए लेना पड़ता है पास

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