दया और स्नेह की दृष्टि को तरसा मिनी हरिद्वार

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ज्वाली में आज तक नहीं बन पाए महिलाओं के लिए स्नानागार, दंगल के लिए स्टेडियम नहीं

ज्वाली – अनिल छांगु

उपमंडल ज्वाली के अधीन देहर खड्ड किनारे पाण्डवों द्वारा अज्ञातवास के दौरान निर्मित मिनी हरिद्वार ज्वाली में हर वर्ष अप्रैल माह में दो दिवसीय जिला स्तरीय बैसाखी मेला होता है।

जिसमें बैसाख संक्रांति को सरोबर में हिमाचल सहित दूरदराज से लोग नहाने के लिए आते हैं तथा अगले दिन यहीं पर जिला स्तरीय दंगल होता है लेकिन सुविधाओं के नाम पर आजतक यहां पर कुछ भी नहीं हो पाया है।

अब जिला स्तरीय बैसाखी मेला को मात्र एक माह का समय शेष रहा है, तो नेताओं को इसकी याद आनी शुरू हो गई है। यह स्थल मात्र राजनेताओं के लिए राजनीतिक रोटियां सेंकने का स्थल बनकर रह गया है।

जब जिला स्तरीय बैसाखी मेला होता है तो राजनेता बतौर मुख्यातिथि शिरकत करके आधुनिक दंगल स्टेडियम बनाने सहित देहर खड्ड किनारे महिलाओं को नहाने के लिए स्नानागार बनाने की घोषणा करते हैं लेकिन घोषणाएं मात्र घोषणाओं तक सीमित होकर रह जाती हैं।

देहर खड्ड किनारे बैसाख संक्रांति को काफी लोग खासकर महिलाएं नहाने के लिए आती हैं, लेकिन स्नानागार न होने के कारण महिलाओं को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। मजबूरन कपड़ों सहित दरिया में ही नहाना पड़ता है।

प्रशासन की तरफ से टेंटनुमा स्नानागार बनाकर ओपचारिकता निभाई जाती है तथा एक घण्टे के उपरांत टेंटनुमा स्नानागार का कोई नामोनिशान नहीं होता।

इस बारे में पूर्व प्रधान एवं पूर्व पार्षद रवि कुमार ने कहा कि मैं जब पंचायत प्रधान था तो पंचायत के पैसों से स्नानागार बनवाया गया था तथा दंगल स्थल को जाने वाला मार्ग पूर्व की भाजपा सरकार ने पक्का करवाया है। उन्होंने कहा कि मंत्री चन्द्र कुमार ने मिनी हरिद्वार के नाम पर मात्र घोषणाएं ही कीं जबकि घोषणाओं को अमलीजामा नहीं पहनाया गया।

कृषि मंत्री चंद्र कुमार के बोल

इस बारे में मंत्री चन्द्र कुमार ने कहा कि मिनी हरिद्वार जवाली को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं के नहाने के लिए स्नानागार तथा अस्थियों को विसर्जित करने के लिए अस्थि विसर्जन घाट का निर्माण करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि दंगल स्टेडियम का भी निर्माण करवाया जाएगा।

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