कांगड़ा बस स्टैंड के दुकानदार बस अड्डा संचालक को बिजली का बिल देने के बावजूद अंधेरे में गुजारने पड़ रहे दिन-रात, जानिए क्या है पूरा मामला?

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कांगड़ा बस अड्डे में अंधेरा कायम, बोर्ड ने 1600000 का बिल पेंडिंग होने पर लिए कड़ा एक्शन, संचालक बोला गलत तरीके से बढ़ाया गया अमाउंट।

कांगड़ा- राजीव जसवाल 

प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा के उपमंडल कांगड़ा शहर की शान माने जाने वाले बस अड्डा पर अंधेरा छा गया बिजली बोर्ड ने बस अड्डे की बिजली काट दी बस अड्डा संचालक के ऊपर बिजली बोर्ड ने 16 लाख 15 हजार 8 सौ 10 रुपए पेंडिंग बिल दर्शाया है।

बोर्ड का दावा है कि संचालक को कई बार नोटिस भेजे गए लेकिन उनकी ओर से बिल न भरने के कारण यह कदम उठाया गया फिलहाल बिजली बोर्ड की कार्रवाई के बाद बस अड्डा में अंधेरा छा गया है यात्रियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है साथ ही लगभग 30 दुकानदार अपना व्यवसाय नहीं कर पा रहे हैं।

बस अड्डे पर बिजली न होने से सबसे ज्यादा असर के दुकानदारों पर पड़ा है दुकानों में बिजली से चलने वाले उपकरणो में रखा सामान खराब हो रहा है इसी तरह टिकट काउंटर पर भी बुरा असर हो रहा है ऑनलाइन सिस्टम से मिनटों में होने वाले कार्य को घण्टों लग रहे हैं।

बस अड्डे की इस हालत से शहर के बुद्धिजीवी वर्ग पर बुरा असर पड़ रहा है, लोगों का कहना है कि रोजाना बस अड्डे पर हजारों लोग देश विदेश से आते हैं बस अड्डे पर बिजली न होने के कारण शहर के बारे में देश-दुनिया में गलत संदेश जा रहा है बरहाल कांगड़ा बस अड्डे की बिजली काट जाने से पूरे शहर में हड़कंप सा मच गया है।

बस अड्डा संचालक क्या कहते हैं जानिए

इस बारे में बस अड्डा के संचालक विजय सूद ने बताया कि बिजली बोर्ड ने गलत तरीके से उनका बिल बढ़ाया है, वह हर महा बिजली का बिल भर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह अपनी ओर से बस अड्डा में बेहतर सेवाएं देने की कोशिश कर रहे हैं। अभी तक वह आउट ऑफ स्टेशन है। शहर आने पर इस समस्या से लोगों को छुटकारा दिलाने की दिशा से हर संभव प्रयास करेंगे।

बिजली बोर्ड ने अपनाया कड़ा रुख सहायक अभियंता संजीव रात्रा

इस बारे में बिजली बोर्ड के एसडीओ संजीव रात्रा ने बताया कि यह कनेक्शन साल 2010 में लगाया गया था कमर्शियल के बाद अब यह कनेक्शन बल्क सप्लाई में आता है। इस माह के बिल के अलावा संचालक का 16,15,810 का पेंडिंग बिल बनता है। पिछले नवंबर माह में तो मासिक बिल भी नहीं भरा गया। कई बार नोटिस देने के बावजूद भी इस तरह का कदम उठाया गया है।

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