आज़ादी के अमृत महोत्सव तथा 100 करोड़ टीकाकरण के पर्व पर नूरपुर किले में दिखा जश्न की रोशनी का शानदार नज़ारा

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नूरपुर 22 अक्तूबर- देवांश राजपूत

आज़ादी के अमृत महोत्सव के पावन वर्ष तथा देश में 100 करोड़ कोरोना टीकाकरण के चुनौतीपूर्ण लक्ष्य को हासिल करने के पर्व पर नूरपुर किला में भी गत सायं दीवारों पर रोशनी से बने तिरंगा का शानदार नज़ारा अपने आप में आज़ादी के जश्न की पुरानी यादों के पर्व का स्मरण करवा रहा था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के शिमला मंडल के तत्वावधान में इस पर्व का आयोजन करवाया गया।

नूरपुर किला बेहद अद्भुत है। क्षतिग्रस्त होने के बावजूद भी किले की कला शैली और इतिहास अपने आप में बेहद रोचक है। इस किले का निर्माण राजा बासु के समय में 1580 से 1613 के मध्य हुआ था। किले में कई राजाओं ने शासन किया और किले का प्रवेश द्वार भी अपने आप में बेहद आकर्षण का केंद्र है। गौरतलब है कि वर्तमान में इसका रख-रखाव भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण करता है।

1849 में यह किला अंग्रेजों के अधीन आ गया था, तब उन्होंने किले के ज्यादातर हिस्से को तहस-नहस कर दिया था और बाकी का हिस्सा साल 1905 में भूकंप के दौरान बर्बाद हो गया। लेकिन इस किले के खंडहर भी इसकी खूबसूरती बयां करते हैं।

नूरपुर के इस किले में जहांगीर ने भी कुछ समय राज किया था। उस समय जहांगीर की पत्नी नूरजहां भी यहां आई थी। इसके बाद ही इस स्थान का नाम नूरपुर पड़ा था, जबकि इस स्थान को पहले धमड़ी कहा जाता था. किले की दीवारें अब भी इतिहास की याद दिलाती है।

कृष्ण के साथ होती है मीराबाई की पूजा

भारत में भगवान श्रीकृष्ण के साथ हमेशा देवी राधा का नाम लिया जाता है और देश के अधिकतर मंदिरों में दोनों की मूर्ति ही एक साथ नजर आती हैं। लेकिन इस किले में मौजूद एक प्राचीन मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण और मीरा बाई की मुर्तियां एक साथ मौजूद हैं।

किले के अंदर मौजूद मंदिर का नाम ‘बृज राज स्वामी मंदिर’, जिसका निर्माण भी 16वीं शताब्दी में किया गया था। यह उन कुछ स्थानों में से एक है, जहां भगवान कृष्ण और मीरा बाई दोनों की पूजा साथ होती है। हर दिन यहां पर दूर-दूर से श्रद्धालु और पर्यटक किले की खूबसूरती को निहारने तथा भगवान श्रीकृष्ण और मीरा बाई का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आते हैं।

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