ऊना में गणपति उत्सव के दौरान मेटल से बनी भगवान गणेश की प्रतिमा का अनोखा विसर्जन किया गया। खास बात यह है कि विदाई के बाद बप्पा की प्रतिमा दोबारा मंदिर में लौटेगी और वहां पूजा-अर्चना की जाएगी।
हिमखबर डेस्क
विदाई के जयकारे होंगे, ढोल- नगाड़े बजेंगे और शोभायात्रा भी निकलेगी… लेकिन इस बार बप्पा भक्तों से हमेशा के लिए विदा नहीं होंगे। ऊना के गीता मंदिर में इस बार गणपति विसर्जन की परंपरा कुछ अलग अंदाज में देखने को मिलेगी।
20 सितंबर को ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयघोष के बीच गणपति बप्पा की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। भवोर साहिब में जलाभिषेक के बाद बप्पा को वापस गीता मंदिर लाया जाएगा, जहां उनकी मूर्ति फिर से स्थापित कर नियमित पूजा- अर्चना जारी रहेगी।
इस अनोखी पहल के पीछे सबसे बड़ी वजह गणपति की मेटल से तैयार मूर्ति है। गीता मंदिर में 14 सितंबर से शहरवासियों की ओर से आठवां गणपति महोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है।
हर साल यहां मिट्टी की प्रतिमा स्थापित कर विसर्जन किया जाता था, लेकिन इस बार आयोजन समिति ने परंपरा में बदलाव करते हुए मेटल की प्रतिमा स्थापित की है। ऐसे में विसर्जन की जगह जलाभिषेक के बाद प्रतिमा को मंदिर में स्थायी रूप से स्थापित करने की योजना बनाई गई है।
आयोजक खामोश जैतक के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में श्रद्धालुओं के बीच गणपति विसर्जन को लेकर अलग- अलग मान्यताएं सामने आती रही हैं। इसी असमंजस को देखते हुए इस बार मेटल की प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय लिया गया।
उनका कहना है कि भवोर साहिब में जलाभिषेक के बाद मूर्ति को वापस गीता मंदिर लाया जाएगा और नियमित रूप से पूजा- अर्चना की जाएगी।
गणपति महोत्सव का सबसे खास आकर्षण 20 सितंबर को निकलने वाली शोभायात्रा होगी। बैंड- बाजों और गाजे- बाजे के साथ गणपति बप्पा को नगर भ्रमण करवाया जाएगा।
श्रद्धालु भक्ति और उत्साह के साथ शोभायात्रा में शामिल होंगे। इसके बाद भवोर साहिब में जलाभिषेक की रस्म होगी और बप्पा की प्रतिमा को फिर से गीता मंदिर लाया जाएगा। यानी इस बार ऊना में विसर्जन की रस्म भी होगी और बप्पा की वापसी भी। यही इस गणपति महोत्सव को सबसे अलग और खास बना रहा है।
महोत्सव के तहत 19 सितंबर को राधा अष्टमी के अवसर पर विशेष संकीर्तन का आयोजन किया जाएगा। रात आठ बजे से गुरप्रीत सिंह गुप्पी गणेश भजनों की प्रस्तुति देंगे।
देर रात तक चलने वाले इस भजन कार्यक्रम में श्रद्धालु गणपति की भक्ति में सराबोर होंगे। इसके अगले दिन निकलने वाली शोभायात्रा महोत्सव का मुख्य आकर्षण रहेगी।
‘आस्था अपनी, परंपरा अपनी’
पंडित जयदेव तिवारी के अनुसार गणेश महोत्सव की परंपरा दक्षिण भारत से धीरे- धीरे उत्तर भारत और हिमाचल तक पहुंची है। श्रद्धालु अपनी आस्था और मान्यताओं के अनुसार पर्व मना रहे हैं। ऐसे में पूजा- पद्धति में स्थानीय स्तर पर किए जा रहे बदलावों को भी श्रद्धा के नजरिए से देखा जाना चाहिए।


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