पांच साल तक पुलिस विभाग में अपनी सेवाएं देने वाली डोरा अब नए घर की तलाश में है। पुलिस विभाग ने डोरा को गोद देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वर्दी में लंबे समय तक ड्यूटी निभाने वाली डोरा अब किसी ऐसे परिवार का इंतजार कर रही है, जहां उसे प्यार और सुरक्षित माहौल मिल सके।
हिमखबर डेस्क
कभी बारूद की गंध पहचानकर सुरक्षा में अहम भूमिका निभाने वाली और कभी वीआईपी ड्यूटी में पूरी मुस्तैदी से तैनात रहने वाली हिमाचल प्रदेश पुलिस की पांच वर्षीय लैब्राडोर डोरा अब अपनी जिंदगी के नए पड़ाव में प्रवेश करने जा रही है। बीमारी के कारण डोरा के लिए पहले जैसी कठिन पुलिस ड्यूटी करना मुश्किल हो गया है।
पशु चिकित्सकों की सलाह के बाद उसे मेडिकल ग्राउंड पर रिटायर करने का फैसला लिया गया है। अब पुलिस विभाग डोरा के लिए ऐसे परिवार की तलाश कर रहा है, जहां उसे सर्विस डॉग नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह प्यार और देखभाल मिले।
साल 2021 में पुलिस विभाग में शामिल होने के बाद डोरा एक्सप्लोसिव डिटेक्शन स्क्वॉड का हिस्सा रही। पिछले पांच वर्षों के दौरान उसने वीआईपी सुरक्षा, भीड़भाड़ वाले आयोजनों और संवेदनशील स्थानों की सैनिटाइजेशन ड्यूटी में अपनी भूमिका निभाई।
उसकी सूंघने की क्षमता और सतर्कता पुलिस टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण रही। बड़े वीआईपी दौरों से लेकर विभिन्न संवेदनशील आयोजनों तक डोरा ने प्रशिक्षित पुलिस डॉग के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाईं।
डोरा ने वर्ष 2024 में शिमला इंटरनेशनल समर फेस्टिवल के डॉग शो में प्रथम स्थान हासिल कर अपनी फुर्ती, अनुशासन और प्रशिक्षण का परिचय भी दिया था। इस उपलब्धि ने उसकी कार्यक्षमता और शानदार प्रशिक्षण को सामने रखा। हालांकि, पिछले कुछ समय से डोरा एक पुरानी बीमारी से जूझ रही है।
बीमारी का असर उसकी चलने-फिरने की क्षमता पर पड़ा है। इसके चलते उसके लिए पहले जैसी कठिन ड्यूटी करना संभव नहीं रहा। इसी को देखते हुए उसे मेडिकल ग्राउंड पर सेवानिवृत्त करने का निर्णय लिया गया है।
डोरा की उम्र अभी केवल पांच वर्ष है। ऐसे में पुलिस विभाग चाहता है कि उसकी आगे की जिंदगी किसी केनेल या कठिन ड्यूटी के बीच नहीं, बल्कि एक सुरक्षित और प्यार भरे घर में बीते। इससे पहले दो रिटायर सर्विस डॉग्स को उनके हैंडलर्स ने अपने पास रख लिया था, लेकिन डोरा का हैंडलर व्यक्तिगत कारणों से उसे अपने साथ नहीं रख पा रहा है। इसलिए अब डोरा के लिए नए परिवार की तलाश की जा रही है।
पुलिस विभाग ने करीब दो महीने पहले रिटायर होने वाले सर्विस डॉग्स को लेकर अपनी नीति में बदलाव किया है। पहले ऐसे डॉग्स को नीलामी के जरिए सौंपा जाता था, लेकिन अब नीलामी की व्यवस्था बंद कर दी गई है। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रिटायर सर्विस डॉग्स का व्यावसायिक इस्तेमाल न हो और उन्हें सुरक्षित वातावरण मिल सके।
नई व्यवस्था के तहत डोरा हिमाचल प्रदेश पुलिस की ओर से गोद दिए जाने वाले तीसरे रिटायर सर्विस डॉग के रूप में सामने आई है। डोरा को गोद लेने में पहली प्राथमिकता पुलिस विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों को दी जाएगी। यदि वहां से उपयुक्त परिवार नहीं मिलता है, तो अन्य इच्छुक और योग्य नागरिक भी आवेदन कर सकेंगे। परिवार का सत्यापन करने के साथ आवश्यक शपथपत्र भी लिया जाएगा।
डोरा ने पांच साल तक इंसानों की सुरक्षा के लिए अपनी सेवाएं दी हैं। अब पुलिस विभाग चाहता है कि उसकी दूसरी पारी सुरक्षित, सम्मानजनक और प्यार भरे माहौल में बीते। वर्दी भले ही उतर जाएगी, लेकिन डोरा की वफादारी और सेवा की कहानी हमेशा याद रहेगी।

