जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के लिए रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक शुभ मुहूर्त रहेगा। जानिए जन्माष्टमी व्रत का पारण कब करें और पूजा की सही विधि क्या है।
शाहपुर – नितिश पठानियां
भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य दिवस कृष्ण जन्माष्टमी पर्व 4 सितंबर शुक्रवार को मनाया जाएगा। शाहपुर के ज्योतिषी आचार्य अमित कुमार शर्मा ने बताया कि पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 4 सितंबर को रात 2 बजकर 25 मिनट से शुरू होगी और 5 सितंबर को रात 12 बजकर 13 मिनट पर समाप्त होगी। रोहिणी नक्षत्र 4 सितंबर को रात 12 बजकर 29 मिनट से शुरू होकर रात 11 बजकर 04 मिनट तक रहेगा।
जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के लिए मध्यरात्रि का समय सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। चार सितंबर की रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा। व्रत रखने वाले श्रद्धालु 5 सितंबर की सुबह 6:01 बजे के बाद पारण कर सकते हैं।
क्यों मनाते हैं कृष्ण जन्माष्टमी
धार्मिक मान्यता है कि भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मथुरा में माता देवकी और वासुदेव के पुत्र के रूप में भगवान कृष्ण ने जन्म लिया था। वैसे तो अष्टमी तिथि हर महीने आती है, लेकिन भाद्रपद कृष्ण अष्टमी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु उपवास रखते हैं और रात में भगवान कृष्ण की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
मान्यता है कि श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए आधी रात के समय पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। जन्माष्टमी पर श्रद्धालु सुबह से ही व्रत और पूजा की तैयारियां शुरू कर देते हैं। दिनभर उपवास रखने के बाद रात में भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया जाता है।
पूजा से पहले बाल गोपाल के लिए भोग और प्रसाद तैयार किया जाता है। मध्यरात्रि के समय भगवान कृष्ण की प्रतिमा या बाल स्वरूप का पंचामृत से अभिषेक किया जाता है। इसके बाद उन्हें नए और साफ वस्त्र पहनाकर उनका श्रृंगार किया जाता है।
पूजा में मोरपंख, बांसुरी और तुलसी दल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके बाद बाल गोपाल को झूले में विराजमान कर झूला झुलाया जाता है।

