हिमाचल प्रदेश में मौसम ने अचानक करवट बदली है। चंबा के साच पास में 30.48 सेंटीमीटर हिमपात से पहाड़ियां बर्फ की चादर से ढक गईं। बर्फबारी के चलते पांगी घाटी का संपर्क प्रभावित हुआ है। वहीं कुल्लू-लाहौल में भी रोहतांग समेत ऊंची चोटियों पर हिमपात से तापमान गिरने के साथ ठंड बढ़ गई है।
हिमखबर डेस्क
चुराह उपमंडल की सबसे ऊंची चोटी साच पास ने बुधवार को सफेद चादर ओढ़ ली। समुद्र तल से करीब 14,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित साच पास में ताजा बर्फबारी हुई है। बुधवार देर रात से क्षेत्र में जारी भारी बारिश के कारण ऊपरी इलाकों में हिमपात का दौर शुरू हो गया।
साच पास में करीब 30.48 सेंटीमीटर तक ताजा बर्फबारी दर्ज की गई है। बर्फ गिरने के बाद पूरा क्षेत्र सफेद नजर आने लगा है। हालांकि, इस ताजा हिमपात ने स्थानीय लोगों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं।
बैरागढ़-साच पास-किलाड़ मार्ग बंद
भारी बर्फबारी के चलते जिला का महत्वपूर्ण बैरागढ़-साच पास-किलाड़ सड़क मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है। सड़क पर बर्फ जमने के कारण वाहनों की आवाजाही बंद हो गई है। मार्ग बंद होने से पांगी घाटी का संपर्क जिला मुख्यालय चंबा से कट गया है।
सड़क मार्ग बाधित होने के कारण पांगी घाटी के लोगों को जरूरी कामकाज के लिए आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मौसम साफ होने और सड़क से बर्फ हटाए जाने तक यातायात बहाल होने की संभावना कम है।
ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बढ़ी ठंड
साच पास और आसपास के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। लगातार बारिश और हिमपात से क्षेत्र में ठंड बढ़ गई है। प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने अब सड़क मार्ग को बहाल करना चुनौती बन गया है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि मौसम में सुधार होते ही सड़क से बर्फ हटाने का काम शुरू किया जाए, ताकि पांगी घाटी का संपर्क जल्द बहाल हो सके।
वहीं जिला कुल्लू और लाहौल-स्पीति में वीरवार सुबह मौसम ने अचानक करवट ली। घाटी के निचले इलाकों में झमाझम बारिश शुरू हो गई, जबकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी का दौर जारी रहा। रोहतांग दर्रा, बारालाचा, शिंकुला और कुंजम दर्रा सहित कई ऊंची चोटियां बर्फ की सफेद चादर से ढक गईं। मौसम में आए इस बदलाव से घाटी में ठंड का प्रकोप बढ़ गया है।
रोहतांग सहित ऊंची चोटियों पर ताजा बर्फबारी
रोहतांग दर्रे समेत ऊंचाई वाले क्षेत्रों में 5 से 10 सेंटीमीटर तक ताजा बर्फबारी रिकॉर्ड की गई है। बारालाचा, शिंकुला और कुंजम दर्रे के आसपास भी बर्फबारी होने से पहाड़ी क्षेत्रों का तापमान नीचे आ गया है। ऊंचे इलाकों में मौसम के इस बदलाव ने सर्दियों की आहट महसूस करा दी है।
बारिश से जनजीवन प्रभावित, गर्मी से मिली राहत
कुल्लू घाटी के निचले क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। लोगों को रोजमर्रा के कामकाज में परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि, लंबे समय से गर्मी झेल रहे लोगों ने बारिश और ठंडक से राहत महसूस की है। मौसम बदलने से तापमान में गिरावट आई और घाटी का वातावरण ठंडा हो गया।
बागवानों की बढ़ी चिंता
बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी ने जहां मौसम को खुशनुमा बनाया है, वहीं बागवानों की चिंता भी बढ़ा दी है। कुल्लू घाटी में सेब समेत अन्य फलों की फसल और बागवानी कार्य मौसम पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में लगातार बारिश और तापमान में बदलाव से बागवानों को फसल की गुणवत्ता और बागों में चल रहे काम को लेकर चिंता सता रही है।
मौसम के इस बदलाव के बीच स्थानीय लोगों और पर्यटकों को ऊंचाई वाले क्षेत्रों की यात्रा करते समय सावधानी बरतने की जरूरत है। दर्रों में बर्फबारी के कारण सड़क और यातायात की स्थिति प्रभावित हो सकती है।
शिमला में सुबह से गरज के साथ बारिश, मौसम ने बदली करवट
राजधानी शिमला में वीरवार सुबह से गरज के साथ बारिश होने से मौसम का मिजाज बदल गया। आसमान में बादल छाए रहे और बारिश के कारण शहर में ठंडक बढ़ गई।

