वतन से इश्क कर पी लिया शहादत का जाम, हिमाचल के 1,738 वीर जवान देश पर हुए कुर्बान

--Advertisement--

हिमखबर डेस्क

ऐ मेरे वतन के लोगो… तुम खूब ला लो नारा, ये शुभ दिन है हम सब का लहरा लो तिरंगा प्यारा, पर मत भूलो सीमा पर वीरों ने हैं प्राण गंवाए, कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट के घर न आए………।

यह पंक्तियां देवभूमि हिमाचल प्रदेश के उन सैन्य वीरों को समर्पित हैं, जिन्होंने मां भारती की रक्षा में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया है। आजादी के 80 सालों में हिमाचल प्रदेश के 1738 जवान देश पर कुर्बान हुए हैं। इनकी वीरता और देश के प्रति समर्पण को पूरी दुनिया सलाम करती है। हिमाचल प्रदेश का कोई ऐसा जिला नहीं जहां से जवानों ने सेना में सेवाएं न दी हों।

देश की रक्षा में प्राणों का बलिदान देने वालों में हर जिला से देशभक्त शामिल रहे हैं। यदि जिलाबार बलिदानियों के आंकड़े पर नजर दौड़ाई जाए, तो वीरगति प्राप्त करने वालों में जिला कांगड़ा सबसे ऊपर है। कांगड़ा जिला के 743 जवानों ने विभिन्न युद्धों में तिरंगे की आन, बान और शान को अपने प्राण न्यौछावर कर बढ़ाया है।

आजादी से अब तक आठ दशकों में दस से अधिक युद्ध लड़े जा चुके हैं, जिनमें 1738 जवान शहीद हुए हैं। इनमें बिलासपुर जिला के 149, चंबा के 48, हमीरपुर के 349, कांगड़ा के 743, कुल्लू के 14, लाहुल-स्पीति से आठ, मंडी से 171, शिमला के 33, किन्नौर के छह, सिरमौर के 46, सोलन के 34 और ऊना के 137 वीर जवान शामिल हैं।

यदि भारतीय सेना द्वारा लड़े गए युद्धों की बात करें तो 1947 से 1949 तक पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में हिमाचल प्रदेश के 136 जवानों की शहादत हुई थी। वहीं वर्ष 1965 से लेकर 1967 के बीच पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में हिमाचल के 344 जवानों ने वीरगति प्राप्त की थी।

वर्ष 1971 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में वीरभूमि के 259 वीर देश की रक्षा में वतन पर कुर्बान हो गए। ऑपरेशन मेघदूत जो कि वर्ष 1984 में सियाचिन ग्लेशियर पर पूर्ण नियंत्रण हासिल करने के लिए भारतीय सस्त्र बलों द्वारा चलाया गया साहसिक सैन्य अभियान था। इस दौरान पाकिस्तानी सेना के साथ हुई झड़प में हिमाचल के 49 वीरों ने प्राणों का बलिदान दिया।

वर्ष 1987 में चलाए गए ऑपरेशन पवन में भारतीय सेना की उग्रवादी संगठन के साथ लड़ाई हुई थी। इस झड़प में प्रदेश के 39 जवान शहीद हो गए थे। बात ऑपरेशन विजय की करें तो इसमें भी शहादत का आंकड़ा काफी रहा है। वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध को ऑपरेशन विजय का नाम दिया गया था। इसमें भारतीय सेना ने कारगिल की पहाडिय़ों पर कब्जा करने वाले पाकिस्तानी घुसपैठियों और सैनिकों को खदेडक़र भारतीय भू-भाग को अपने नियंत्रण में लिया था।

इस युद्ध में हिमाचल प्रदेश के 57 जवानों ने देश की रक्षा में प्राणों की आहूति दी थी। 13 सितंबर 2001 को भारतीय संसद पर हुए आतंकवादी हमले के जवाब में भारत सरकार द्वारा ऑपरेशन पराक्रम सैन्य अभियान चलाया गया था। उस युद्ध में राज्य के 77 वीरों ने शहादत पाई थी। सबसे अधिक शहादत ऑपेरशन रक्षक में हुई है।

ऑपरेशन रक्षक एक प्रमुख आतंकवाद और उग्रवाद विरोधी अभियान था। यह जम्मू-कशमीर में शुरू किया गया था। उस दौरान हिमाचल प्रदेश के 383 जवान शहीद हो गए थे। इसके साथ ही अन्य ऑपरेशनों में भी हिमाचल के 210 जवानों ने देश की सरहदों की रक्षा में अपना बलिदान दिया है।

आजादी से लेकर अब तक 80 साल में हिमाचल प्रदेश से 1738 जवान शहीद हुए हैं। हर जिला से जवानों ने शहादत प्राप्त की है। देश की रक्षा में समय-समय पर विभिन्न सैन्य ऑपेरशन चलाए गए जिनमें सेना के वीर जवानों ने वीरता और पराक्रम का प्रमाण देते हुए प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया है। हम उन वीर सपूतों को शत-शत नमन करते हैं।

“रि. ब्रिगेडियर मदनशील शर्मा, निदेशक पूर्व सैनिक कल्याण निदेशालय, हमीरपुर”

--Advertisement--
--Advertisement--

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

--Advertisement--

Popular

More like this
Related

पहले शराब पिलाई, फिर युवती से दुष्कर्म का आरोप; क्वार्टर से 9 लाख रुपये भी गायब

हिमखबर डेस्क हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में एक युवती...