सफलता की कहानीः 12 लाख से बना ‘अपना पुस्तकालय’ बदल रहा ग्रामीण बच्चों की पढ़ाई की तस्वीर, रोजाना 60 विद्यार्थी अध्ययनरत

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डलाह में 12 लाख रुपये की लागत से तैयार ‘अपना पुस्तकालय’ ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है। पुस्तकालय में रोजाना करीब 50-60 विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं।

हिमखबर डेस्क

प्रदेश सरकार के तत्वावधान एवं जिला प्रशासन के प्रयासों से ग्राम पंचायत डलाह स्थित पधर में स्थापित ‘अपना पुस्तकालय’ ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए सफलता की नई राह खोल रहा है।

27 फरवरी, 2025 को शुरू हुआ यह पुस्तकालय विद्यार्थियों को बेहतर अध्ययन वातावरण के साथ आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाकर उनके सपनों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

करीब 12 लाख रुपये की लागत से तैयार इस पुस्तकालय में एक समय में लगभग 60 विद्यार्थियों के बैठने की व्यवस्था है। यहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए करीब 500 पुस्तकें, कंप्यूटर, वाई-फाई सुविधा, अच्छा फर्नीचर तथा बिजली के बैकअप के लिए सोलर सिस्टम उपलब्ध करवाया गया है। सुरक्षा की दृष्टि से सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। विद्यार्थियों की सुविधा के लिए पुस्तकालय में निजी अध्ययन केबिन की व्यवस्था भी की गई है।

‘अपना पुस्तकालय’ की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अब तक करीब 115 विद्यार्थी इसकी सदस्यता ले चुके हैं तथा प्रतिदिन 50 से 60 विद्यार्थी नियमित रूप से यहां अध्ययन करने पहुंच रहे हैं।

पुस्तकालय के संचालन के लिए विद्यार्थियों की समिति गठित की गई है, जिसमें विद्यार्थियों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इससे उनमें अध्ययन के साथ-साथ नेतृत्व और जिम्मेदारी की भावना भी विकसित हो रही है।

इस पुस्तकालय से अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों की उपलब्धियां इसकी सफलता की कहानी स्वयं बयां करती हैं। अब तक यहां पढ़ने वाले दो युवा लेक्चरर, दो पुलिस कर्मियों सहित तीन विद्यार्थियों ने राज्य पात्रता परीक्षा (SET) परीक्षा उत्तीर्ण की है। इसके अलावा कई विद्यार्थी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और पुस्तकालय को अपनी सफलता की तैयारी का महत्वपूर्ण माध्यम मानते हैं।

*निजी पुस्तकालय का खर्च बचा, पढ़ाई का मिला बेहतर माहौल*

पुस्तकालय में अध्ययन कर रही तनुजा बताती हैं कि पहले वह निजी पुस्तकालय जाती थीं, लेकिन ‘अपना पुस्तकालय’ शुरू होने के बाद से वह नियमित रूप से यहीं अध्ययन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यहां सरकार की ओर से विद्यार्थियों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई हैं, जिसके लिए वह राज्य सरकार की आभारी हैं।

निखिल कुमार पिछले करीब नौ माह से यहां पीजीटी (PGT) की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि निजी पुस्तकालयों की फीस अधिक होने के कारण विद्यार्थियों को आर्थिक परेशानी होती है, लेकिन ‘अपना पुस्तकालय’ शुरू होने से स्थानीय छात्रों को बड़ी सुविधा मिली है। उन्होंने क्षेत्र के विद्यार्थियों से इस सुविधा का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान किया।

अंबिका पिछले तीन माह से पुस्तकालय में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं। उनका कहना है कि यहां प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित आवश्यक पुस्तकें उपलब्ध हैं और वाई-फाई के माध्यम से ऑनलाइन अध्ययन की सुविधा भी मिलती है। उन्होंने इस सुविधा के लिए सरकार एवं प्रशासन का आभार व्यक्त किया।

सोनिया नर्सिंग की तैयारी के लिए पिछले तीन माह से पुस्तकालय आ रही हैं। उन्होंने बताया कि यहां निजी अध्ययन केबिन और नर्सिंग से संबंधित पुस्तकें उपलब्ध होने से उनकी तैयारी को काफी मदद मिल रही है।

पुस्तकालय की विद्यार्थी समिति के अध्यक्ष सोमदत्त बताते हैं कि पहले स्थानीय विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए निजी पुस्तकालयों अथवा मंडी जाना पड़ता था। ‘अपना पुस्तकालय’ खुलने के बाद विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र में ही बेहतर अध्ययन सुविधा मिल रही है। उन्होंने बताया कि यहां अध्ययन करने वाले कई विद्यार्थियों का सरकारी सेवाओं में चयन हुआ है और स्वयं उन्होंने भी राज्य पात्रता परीक्षा परीक्षा उत्तीर्ण की है।

एसडीएम पधर सुरजीत सिंह ने कहा कि सरकार और जिला प्रशासन का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बेहतर एवं समान शैक्षणिक अवसर उपलब्ध करवाना है। उन्होंने कहा कि ‘अपना पुस्तकालय’ में विद्यार्थियों के लिए पुस्तकें, कंप्यूटर, वाई-फाई, सोलर बैकअप सहित सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई हैं। प्रतिदिन करीब 60 विद्यार्थियों का यहां अध्ययन करने आना इसकी सफलता को दर्शाता है।

डलाह का ‘अपना पुस्तकालय’ अब महज किताबों से भरा एक कमरा नहीं, बल्कि ग्रामीण युवाओं के सपनों और सफलता का केंद्र बन चुका है। सरकार की सुविधाओं, प्रशासन के प्रयासों और विद्यार्थियों की मेहनत का यह संगम क्षेत्र के अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणा बन रहा है।

यह पहल इस विश्वास को मजबूत करती है कि सुविधाएं यदि सही स्थान तक पहुंचे और मेहनत करने वाले हाथों को उचित मंच मिले, तो ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थी भी सफलता की नई ऊंचाइयां हासिल कर सकते हैं।

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