अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पोकसो कोर्ट रामपुर ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दोषी राम बहादुर पुत्र पूर्ण बहादुर, निवासी खलंगा, जिला जुमला, नेपाल को 20 वर्ष के कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी को बीएनएस और पॉक्सो अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी करार दिया।
उपजिला न्यायवादी किन्नौर स्थित रामपुर बुशहर कमल चंदेल ने बताया कि बाल पीड़िता और उसकी माता घटना से कुछ दिन पहले ही नेपाल से रिकांगपिओ आए थे। बाल पीड़िता के हृदय में छेद था और उसकी माता उसका उपचार भारत में करवाना चाहती थी। छह नवंबर 2024 को बाल पीड़िता की माता काम की तलाश में बाहर गई थी। इसी दौरान बाल पीड़िता पानी भरने के लिए आरोपी के क्वार्टर के पास गई थी।
आरोप है कि उस समय आरोपी शराब के नशे में था। उसने बाल पीड़िता को जबरदस्ती पकड़कर अपने कमरे में ले गया और दरवाजा बंद कर उसके साथ दुष्कर्म किया। इसी दौरान बाल पीड़िता ने आरोपी के फोन से अपनी माता को घटना की जानकारी दी। माता ने एक नेपाली व्यक्ति को आरोपी के कमरे के पास भेजा। वहां पहुंचने पर कमरे के अंदर से बाल पीड़िता के रोने की आवाज सुनाई दी।
दरवाजा खोलने पर आरोपी अर्धनग्न अवस्था में मिला, जबकि बाल पीड़िता के कपड़े भी उतरे हुए थे। इसके बाद बाल पीड़िता की माता ने थाना रिकांगपिओ में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और जांच पूरी करने के बाद चालान अदालत में पेश किया। मामले की जांच एसआई भारत सिंह ने की।
अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 20 गवाहों के बयान दर्ज करवाए गए। गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
सगी बेटी के शोषण के मामले में भी 20 साल की सजा
इसी अदालत ने एक अन्य पॉक्सो मामले में आरोपी को अपनी सगी बेटी का करीब दो से तीन वर्ष तक शारीरिक शोषण करने के आरोप सिद्ध होने पर 20 वर्ष के कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। पीड़िता की पहचान की सुरक्षा के मद्देनजर आरोपी का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है।

