धर्मशाला में खिलाड़ियों की खेल सुविधाओं से जुड़ा मामला सामने आया है। मेडल विजेता खिलाड़ी तैयार करने वाला एथलेटिक्स ट्रैक बंद पड़ा है, जबकि खेल होस्टल पर पिछले चार साल से ताला लगा हुआ है, हिमाचल की बेटियों को नेशनल-इंटरनेशनल में पदक दिलाने वाले होस्टल पर चार साल से ताला, खेल प्रेमियों में निराशा
हिमखबर डेस्क
पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला का हाई एल्टीट्यूड और सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक वर्षों से देश के धावकों के लिए पसंदीदा अभ्यास स्थल रहा है। इसी मैदान से प्रशिक्षण लेकर हिमाचल की बेटियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते हैं। हाल ही में चंबा की धाविका सीमा ने आइची-नागोया एशियन गेम्स में दस हजार मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर एक बार फिर धर्मशाला के प्रशिक्षण ढांचे की उपयोगिता सामने ला दी है।
बावजूद इसके नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस एनसीओई धर्मशाला में पिछले तीन से चार वर्षों से एथलेटिक्स प्रशिक्षण व होस्टल सुविधा को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। ऐसे में अब बड़े सवाल उठ रहे हैं कि भारत को मेडल दिलाने वाले सेंटर व ट्रैक से एथलेटिक्स गेम को क्यों हटाया गया है।
इसे लेकर खिलाडिय़ों सहित पूर्व कोच, कोच व पूर्व अधिकारी व खेल प्रेमी भी बड़े सवाल उठा रहे हैं। हालांकि साई की आधिकारिक सूची में धर्मशाला के एनसीओई के लिए एथलेटिक्स (गल्र्ज), कबड्डी और वालीबॉल गल्र्ज गेम्स प्रदान किए गए थे, जबकि मौजूदा समय में मात्र कबड्डी व बॉलीवॉल ही चलाए जा रहे हैं।
इससे पहले हॉकी व बॉस्केटवॉल पहले ही बंद किए जा चुके हैं। ऐसे में सवाल यह है कि जब धर्मशाला की ऊंचाई, सिंथेटिक ट्रैक और प्रशिक्षण वातावरण से सीमा जैसी खिलाड़ी एशियन गेम्स का पदक जीत सकती हैं, और देश के नामी एथलीट यहां तैयारी कर चुके हैं, तो इस सुविधा का नियमित और व्यापक इस्तेमाल क्यों नहीं हो रहा।
धर्मशाला के ट्रैक की उपयोगिता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पंजाब के स्टार शॉटपुट खिलाड़ी तजिंदरपाल सिंह तूर ने 2018 एशियाई खेलों से पहले यहां करीब तीन महीने का विशेष प्रशिक्षण शिविर लगाया था।
उसी एशियाई खेल में उन्होंने स्वर्ण पदक के साथ 20.75 मीटर का खेल रिकॉर्ड बनाया था। लंबी दूरी की धाविका ओपी जैशा भी धर्मशाला में प्रशिक्षण कर चुकी हैं। इन उपलब्धियों के बावजूद पिछले कुछ वर्षों से धर्मशाला में एथलेटिक्स के नियमित प्रशिक्षण ढांचे को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
उधर, सीमा और हरमिलन जैसे खिलाडिय़ों के प्रशिक्षक एवं पूर्व साई केंद्र धर्मशाला प्रभारी केएस पटियाल भी धर्मशाला में एथलेटिक्स को फिर से व्यवस्थित तरीके से शुरू करने के पक्ष में हैं। उनका कहना है कि ट्रैक को दोबारा मजबूत स्वरूप में शुरू किया जाना चाहिए, ताकि हिमाचल और देशभर की प्रतिभाओं को इसका लाभ मिल सके।
खिलाडिय़ों की मांग
खिलाडिय़ों की मांग है कि धर्मशाला को दोबारा एथलेटिक्स के प्रमुख प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। बता दें कि नियमित प्रशिक्षण, आवास और छात्रावास की सुविधा पर्याप्त नहीं होने की बात सामने आती रही है।
सहायक निदेशक जेपी साहनी के बोल
साई के सहायक निदेशक जेपी साहनी का कहना है कि एथलेटिक्स को लेकर साई स्तर पर प्रस्ताव पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि साई केंद्र दिल्ली व चंडीगढ़ से धर्मशाला में एथलेटिक्स दोबारा शुरू करने की प्रस्तावित व्यवस्था पर कार्य किया जा रहा है।

