HRTC कंडक्टर की बेटी से IPS तक का सफर; 33 में 32 प्रतियोगी परीक्षाएं पास करने वाली शालिनी अग्निहोत्री की कहानी

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हिमाचल की शालिनी अग्निहोत्री ने HRTC कंडक्टर की बेटी से IPS अधिकारी बनने तक का सफर तय किया। उन्होंने 33 में से 32 प्रतियोगी परीक्षाएं पास कीं।

हिमखबर डेस्क

सोचिए, 33 मुकाबले, 32 जीत और सिर्फ एक हार! जिस लड़की को जमा दो के बाद एक भी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता नहीं मिली, उसी ने आगे चलकर UPSC जैसी देश की प्रतिष्ठित परीक्षा पास कर ली। लेकिन इस कहानी में एक बड़ा ट्विस्ट है। 33 में से 32 प्रतियोगी परीक्षाएं पास करने वाली शालिनी अग्निहोत्री आखिर एक परीक्षा में फेल क्यों हुईं? आखिर वह कौन-सी परीक्षा थी, जिसमें उन्हें सफलता नहीं मिली? हालांकि, यह असफलता उनके सफर का अंत नहीं बनी।

उसी दौर में उन्होंने UPSC परीक्षा भी दी और ऑल इंडिया रैंक 285 हासिल कर IPS अधिकारी बन गईं। आज की कहानी ‘द प्राइड ऑफ हिमाचल’ में जानेंगे कि कैसे एक साधारण परिवार की बेटी शालिनी ने मेहनत, छात्रवृत्ति और आत्मविश्वास के दम पर देश की प्रतिष्ठित पुलिस सेवा तक अपना सफर तय किया।

महिला IPS अधिकारी शालिनी अग्निहोत्री की कहानी सिर्फ सफलता की दास्तां नहीं है। इसमें छात्रवृत्ति है, बैंक की नौकरी का विकल्प है, बचपन की एक ऐसी घटना है, जिसने उनके मन में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को लेकर जिज्ञासा पैदा की, और फिर है मेहनत से हासिल की गई बड़ी कामयाबी।

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के ठठल गांव से ताल्लुक रखने वाली शालिनी अग्निहोत्री के पिता रमेश अग्निहोत्री HRTC में कंडक्टर रहे, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। परिवार साधारण था, संसाधन सीमित थे, लेकिन बेटी के सपनों पर कोई बंदिश नहीं थी। धर्मशाला के डीएवी स्कूल से पढ़ाई पूरी करने के बाद शालिनी ने हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर से कृषि विषय में स्नातक की डिग्री हासिल की। पढ़ाई के साथ-साथ उनकी रुचि खेलों में भी रही।

12वीं कक्षा के बाद शालिनी ने मेडिकल और इंजीनियरिंग से जुड़ी कई प्रतियोगी परीक्षाएं दीं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। उस समय उनके मन में UPSC परीक्षा देने का सपना भी नहीं था। लगातार असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और ग्रेजुएशन में दाखिला लेकर आगे की पढ़ाई जारी रखने का फैसला किया।

उनकी जिंदगी का असली मोड़ एमएससी की पढ़ाई के दौरान आया, जब प्रतियोगी परीक्षाओं में उनकी सफलता का सिलसिला शुरू हुआ। शालिनी ने 33 में से 32 प्रतियोगी परीक्षाएं पास कीं। लेकिन जिस एक परीक्षा में वह सफल नहीं हो पाईं, वह थी हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा यानी HPAS।

खास बात यह है कि उसी साल उन्होंने HPAS और UPSC दोनों परीक्षाएं दी थीं। HPAS में सफलता नहीं मिली, लेकिन UPSC में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 285 हासिल कर इतिहास रच दिया। यानी एक परीक्षा में मिली असफलता उनके लिए रुकावट नहीं बनी, बल्कि वह आगे बढ़ती रहीं। आईपीएस शालिनी अग्निहोत्री के जीवन में छात्रवृत्ति का भी बेहद अहम योगदान रहा।

एक समय ऐसा आया, जब उन्हें एक ओर छात्रवृत्ति मिली, वहीं दूसरी ओर ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स बैंक में कृषि अधिकारी के पद पर चयन भी हो गया। अब उनके सामने दो रास्ते थे बैंक की नौकरी ज्वाइन करना या छात्रवृत्ति के सहारे आगे की पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखना।

शालिनी के मुताबिक, अगर उन्हें छात्रवृत्ति नहीं मिली होती, तो शायद वह बैंक की नौकरी ज्वाइन कर लेतीं। यानी जिस सफर की शुरुआत बैंक की नौकरी से हो सकती थी, वह आगे चलकर UPSC तक पहुंच गया। छात्रवृत्ति ने उन्हें आर्थिक सहारा दिया और उनकी मेहनत ने उस अवसर को सफलता में बदल दिया।

करीब 18 महीने की कड़ी तैयारी के बाद शालिनी अग्निहोत्री ने वर्ष 2011 में  UPSC परीक्षा दी। जब परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ, तो उन्होंने पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 285 हासिल की। इसके साथ ही  IPS अधिकारी का  रुतबा मिल गया।  खास बात यह रही कि उन्होंने यह सफलता किसी बड़े कोचिंग संस्थान के सहारे नहीं, बल्कि स्व-अध्ययन, अनुशासन और लगातार मेहनत के दम पर हासिल की।

शालिनी के अधिकारी बनने की कहानी सिर्फ किताबों और प्रतियोगी परीक्षाओं से नहीं जुड़ी है। इसके पीछे बचपन का एक अनुभव भी रहा। मां के साथ बस में सफर के दौरान एक घटना में उन्होंने अपनी मां के सम्मान के लिए विरोध किया। उस समय सामने से मिले एक जवाब ने उनके मन में सवाल पैदा किया।

आखिर पुलिस या प्रशासनिक अधिकारी के पास ऐसी क्या ताकत होती है, जिससे वह आम इंसान के सम्मान और सुरक्षा के लिए मजबूती से खड़ा हो सकता है?  उस उम्र में शालिनी को शायद SP या DC का अर्थ भी ठीक से मालूम नहीं था, लेकिन यह सवाल उनके मन में रह गया। आगे चलकर यही जिज्ञासा उनके सपनों का हिस्सा बनी और उन्होंने देश की प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की।

UPSC में सफलता हासिल करने के बाद शालिनी ने ट्रेनिंग के दौरान भी शानदार प्रदर्शन किया। उन्हें सर्वश्रेष्ठ ऑल राउंडर प्रशिक्षु अधिकारी चुना गया। शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्रधानमंत्री बैटन और गृह मंत्रालय की रिवॉल्वर से सम्मानित किया गया। ट्रेनिंग के बाद उन्होंने हिमाचल प्रदेश में पुलिस की कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।

वह कुल्लू, मंडी और कांगड़ा जैसे बड़े जिलों की एसपी रहीं। कुल्लू में नशे के खिलाफ चलाए गए अभियानों और कार्रवाई के कारण भी उनकी पहचान बनी। वर्ष 2023 में उन्हें कांगड़ा की एसपी नियुक्त किया गया और वह जिले की पहली महिला पुलिस अधीक्षक बनीं।

शालिनी अग्निहोत्री की निजी जिंदगी भी काफी दिलचस्प है। पुलिस ट्रेनिंग के दौरान उनकी मुलाकात उत्तर प्रदेश कैडर के IPS अधिकारी संकल्प शर्मा से हुई। करीब सात वर्ष तक एक-दूसरे को समझने के बाद दोनों ने 5 मार्च 2018 को शादी की। आज संकल्प शर्मा Additional CP, कानपुर के पद पर तैनात हैं।

आईपीएस अधिकारी शालिनी की सफलता का एक भावुक हिस्सा उनके पिता रमेश अग्निहोत्री से जुड़ा हुआ है। HRTC में कंडक्टर की नौकरी करने वाले पिता ने सामान्य परिस्थितियों में अपनी बेटी को पढ़ाया। वही बेटी एक दिन IPS अधिकारी बनी। ट्रेनिंग अकादमी में जब एक फैकल्टी सदस्य ने उनके पिता को ‘सर’ कहकर संबोधित किया, तो वह पल उनके लिए बेहद खास था। यह सिर्फ बेटी की सफलता नहीं थी, बल्कि उस पिता की मेहनत और त्याग का सम्मान था, जिसने अपनी बेटी के सपनों को पूरा करने में अपना जीवन लगा दिया।

हिमाचल प्रदेश में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने के बाद शालिनी के करियर ने दिल्ली की ओर भी कदम बढ़ाया। वर्ष 2025 में उन्हें स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, दिल्ली में उप सचिव के पद पर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर नियुक्त किया गया। एक छोटे से गांव से शुरू हुआ उनका सफर तीन बड़े जिलों की पुलिस कमान से होते हुए देश की राजधानी तक पहुंचा।

बहरहाल, IPS शालिनी अग्निहोत्री की कहानी सिर्फ यह नहीं बताती कि 33 में से 32 प्रतियोगी परीक्षाएं पास की जा सकती हैं। यह दास्तां यह भी सिखाती है कि असफलता जिंदगी का अंत नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का एक पड़ाव है। कभी-कभी एक परीक्षा में मिली हार आपको उस मंजिल तक पहुंचा देती है, जिसका आपने शायद सपना भी नहीं देखा होता। सीमित संसाधनों में बड़े सपने देखने वाले हर युवा के लिए शालिनी अग्निहोत्री की कहानी एक प्रेरणा है। यह थी ‘द प्राइड ऑफ हिमाचल’ में IPS शालिनी अग्निहोत्री की सफलता का सफर।

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