हिमाचल की लक्ष्मी ने बेकार सामान और कचरे को अपने हुनर से खूबसूरत चीजों में बदल दिया। उनकी रचनात्मकता और मेहनत लोगों के लिए बनी आकर्षण का केंद्र।
शाहपुर – नितिश पठानियां
जिसे हम लोग अकसर बेकार समझकर कूड़ेदान में फेंक देते हैं, उसी सामान को सोलन की लक्ष्मी अपनी कल्पना और हुनर से खूबसूरत कलाकृतियों में बदल रही हैं। ‘वेस्ट से बेस्ट’ की सोच के साथ लक्ष्मी ने पानी की पुरानी प्लास्टिक बोतलों, इस्तेमाल किए जा चुके चम्मचों और घर में बेकार पड़े सामान से ऐसी कलाकृतियां तैयार की हैं, जो देखने में आकर्षक होने के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देती हैं।
लक्ष्मी उन्नति स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं और अपने हुनर को आगे बढ़ाने के साथ अन्य महिलाओं को भी रचनात्मक कार्यों के लिए प्रेरित कर रही हैं। लक्ष्मी ने बताया कि घरों में रोजाना इस्तेमाल होने वाली कई वस्तुएं उपयोग के बाद बेकार समझ ली जाती हैं।
उन्होंने इन्हीं वस्तुओं को फेंकने के बजाय उनका दोबारा उपयोग करने का प्रयास शुरू किया। इसी सोच के तहत उन्होंने पानी की पुरानी बोतलों को अलग-अलग तरीके से काटकर और सजाकर सुंदर झूमर तैयार किए। बोतलों को आकर्षक आकार देकर उनमें सजावटी सामग्री का इस्तेमाल किया गया, जिससे तैयार झूमर घर की सजावट के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
इसी तरह पुराने चम्मच को भी लक्ष्मी ने नया रूप दिया। चम्मचों को रचनात्मक तरीके से सजाकर उन्होंने आकर्षक पेंटिंग तैयार की। देखने में सामान्य लगने वाले चम्मच जब कलाकारी के साथ एक जगह सजाए गए तो उन्होंने एक खूबसूरत कलाकृति का रूप ले लिया। लक्ष्मी का कहना है कि इस तरह की कला के लिए महंगे सामान की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि जरूरत होती है तो सिर्फ कल्पना, धैर्य और मेहनत की।
उन्नति स्वयं सहायता समूह से बदला जीवन
उन्नति स्वयं सहायता समूह से जुडऩे के बाद लक्ष्मी को अपने हुनर को लोगों तक पहुंचाने का अवसर मिला। समूह के माध्यम से महिलाएं विभिन्न प्रकार के हस्तशिल्प और उपयोगी वस्तुएं तैयार करने के साथ उन्हें बाजार तक पहुंचाने की दिशा में भी काम कर रही हैं। लक्ष्मी का प्रयास है कि वेस्ट सामग्री से तैयार उत्पादों को अधिक आकर्षक बनाकर इन्हें आमदनी का साधन बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि ‘वेस्ट से बेस्ट’ की कला से एक तरफ घर में बेकार पड़े सामान का दोबारा इस्तेमाल हो जाता है, वहीं दूसरी ओर इससे पर्यावरण पर पडऩे वाले कचरे के बोझ को कम करने में भी मदद मिलती है। प्लास्टिक की बोतलें और अन्य वस्तुएं लंबे समय तक कचरे का हिस्सा बनी रहती हैं, लेकिन रचनात्मक तरीके से इनका इस्तेमाल कर इन्हें उपयोगी बनाया जा सकता है।
जरूरत है तो सिर्फ कल्पना की
लक्ष्मी का हुनर प्रदेश की महिलाओं को यह संदेश देता है कि थोड़ी सी कल्पना और मेहनत से बेकार समझी जाने वाली चीजों को भी खूबसूरत और उपयोगी बनाया जा सकता है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं इस तरह के हुनर के माध्यम से आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं और अपने काम से समाज को पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रही हैं।

