राशन डिपुओं में मिलेगा एपीएल परिवारों को एक किलो अधिक आटा, अक्टूबर में एपीएल राशनकार्ड पर 13 किलो आटा और 5 किलो चावल मिलेगा
हिमखबर डेस्क
प्रदेश में त्योहारी सीजन के बीच सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत एपीएल परिवारों को राहत मिलने जा रही है। अक्टूबर महीने में राशन डिपुओं पर एपीएल परिवारों को पहले के मुकाबले एक किलो अधिक आटा मिलेगा।
अब एपीएल राशनकार्ड धारकों को 12 किलो के बजाय 13 किलो आटा प्रति राशनकार्ड दिया जाएगा। वहीं चावल के कोटे में कोई बदलाव नहीं किया गया है और पहले की तरह 5 किलो चावल प्रति राशनकार्ड मिलेगा।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने अक्टूबर महीने के लिए सस्ते राशन की इंटरनल टाइड ओवर एलोकेशन कर दी है। विभाग की ओर से प्रदेशभर के लिए राशन का आवंटन किया गया है।
विभाग की निदेशक कुमुद सिंह ने बताया कि अक्टूबर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत एपीएल परिवारों को 13 किलो आटा और 5 किलो चावल प्रति परिवार उपलब्ध करवाया जाएगा।
अक्टूबर में नवरात्र, दशहरा, करवाचौथ और महर्षि वाल्मीकि जयंती सहित कई त्योहार होने के कारण परिवारों का खर्च बढऩे वाला है। ऐसे में डिपुओं पर मिलने वाले आटे के कोटे में एक किलो की बढ़ोतरी से एपीएल परिवारों को कुछ राहत मिलेगी।
पहले एपीएल परिवारों को 12 किलो आटा मिलता था, जबकि अक्टूबर में यह मात्रा बढ़ाकर 13 किलो कर दी गई है। विभाग की एलोकेशन के अनुसार अक्टूबर के लिए प्रदेश में कुल 16,685.13 मीट्रिक टन आटे का आवंटन किया गया है।
इसमें 13,354.25 मीट्रिक टन आटा एपीएल परिवारों के लिए रखा गया है। इसके अलावा 2,327.27 मीट्रिक टन एपीएल और 837 मीट्रिक टन पीएचएच परिवारों के लिए आवंटित किया गया है। हलांकि चावल के कोटे में नहीं हुआ बदलाव है।
अक्टूबर के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत कुल 8,341.32 मीट्रिक टन चावल की इंटरनल टाइड ओवर एलोकेशन की गई है। इसमें 6,388.71 मीट्रिक टन चावल एपीएल परिवारों के लिए निर्धारित किया गया है।
वहीं 1,818.41 मीट्रिक टन बीपीएल और 134.20 मीट्रिक टन पीएचएच परिवारों के कोटे में शामिल किया गया है। एपीएल परिवारों के चावल के कोटे में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। अक्टूबर में भी प्रत्येक एपीएल राशनकार्ड पर 5 किलो चावल ही मिलेगा।
विभाग के आंकड़ों के अनुसार हिमाचल प्रदेश में कुल 19,58,895 राशनकार्ड धारक पंजीकृत हैं। इनमें सबसे अधिक 11,60,019 राशनकार्ड एपीएल श्रेणी के हैं।

