मंडी की अंजलि ठाकुर ने चेक गणराज्य में आयोजित बोशिया प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया। उनकी इस उपलब्धि से हिमाचल और देश का गौरव बढ़ा है।
हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी के गोहर उपमंडल के जन्यानी गांव से संबंध रखने वाली अंजलि ठाकुर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते हुए देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है।
चेक गणराज्य के पिल्सेन शहर में आयोजित विश्व बोशिया चैलेंजर 2026 में अंजलि ठाकुर ने अजय राज के साथ मिलकर भारत के लिए बीसी3 मिश्रित युगल वर्ग में स्वर्ण पदक जीता है। भारतीय जोड़ी ने फाइनल मुकाबले में सिंगापुर की जोड़ी को हराकर यह बड़ी उपलब्धि अपने नाम की।
अंजलि ठाकुर की इस सफलता से मंडी जिला ही नहीं, बल्कि पूरा हिमाचल गौरवान्वित हुआ है। गोहर के जन्यानी गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना उनकी मेहनत, लगन और खेल प्रतिभा का शानदार उदाहरण है। उनकी इस उपलब्धि ने प्रदेश के पैरा खिलाड़ियों की प्रतिभा और संभावनाओं को भी सामने लाया है।
अंजलि ठाकुर और अजय राज की इस शानदार जीत पर खेल प्रेमियों और क्षेत्रवासियों में खुशी की लहर है। जन्यानी गांव की बेटी को देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी जा रही हैं। उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
पिल्सेन 2026 विश्व बोशिया चैलेंजर का आयोजन 7 से 15 सितंबर तक चेक गणराज्य में हुआ। यह चेक गणराज्य की धरती पर आयोजित पहला विश्व बोशिया चैलेंजर था। प्रतियोगिता में 22 देशों के 80 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया।
क्या है बोशिया खेल
बोशिया एक पैरालंपिक खेल है, जिसमें खिलाड़ी अपनी गेंदों को लक्ष्य गेंद के अधिक से अधिक करीब पहुंचाने का प्रयास करते हैं। यह खेल सटीकता, रणनीति और एकाग्रता पर आधारित है। BC3 वर्ग में खिलाड़ी रैंप और सहायक उपकरणों की मदद से गेंद को लक्ष्य तक पहुंचाते हैं। मिश्रित युगल मुकाबलों में महिला और पुरुष खिलाड़ी मिलकर टीम बनाते हैं।

