नन्हे शिवाक्ष ने अपनी असाधारण याददाश्त और प्रतिभा का परिचय देते हुए 195 देशों के झंडों को पहचानकर India Book of Records में अपना नाम दर्ज करवाया है।
हिमखबर डेस्क
हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के चौपाल क्षेत्र के मडावग निवासी महज छह साल के शिवाक्ष रापटा ने अपनी असाधारण प्रतिभा और याददाश्त के दम पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। शिवाक्ष ने India Book of Records में अपना नाम दर्ज कराया है। उन्हें ‘IBR Achiever’ के खिताब से नवाजा गया है।
शिवाक्ष ने महज 12 मिनट 56 सेकंड में दुनिया के सभी 195 देशों के झंडों की पहचान कर उनके नाम बताए। इतना ही नहीं, उन्होंने आउटलाइन वर्ल्ड मैप पर इन सभी देशों की सही भौगोलिक स्थिति भी दर्शाई। इतनी कम उम्र में इस तरह की उपलब्धि हासिल करना शिवाक्ष की असाधारण स्मरण शक्ति और भूगोल के प्रति उनकी रुचि को दर्शाता है।
India Book of Records की ओर से जारी प्रमाण पत्र के मुताबिक शिवाक्ष रापटा की इस उपलब्धि की 24 अगस्त को पुष्टि की गई।इसके बाद 5 सितंबर 2026 को आधिकारिक प्रमाण पत्र जारी किया गया। प्रमाण पत्र पर India Book of Records के मुख्य संपादक डॉ. बिस्वरूप रॉय चौधरी के हस्ताक्षर हैं।
रिकॉर्ड के तहत शिवाक्ष ने न केवल विभिन्न देशों के झंडों को देखकर उनकी पहचान की, बल्कि उनके नाम भी बताए और विश्व मानचित्र पर उनकी स्थिति को सही ढंग से दर्शाया।
LKG का छात्र है शिवाक्ष
शिवाक्ष रापटा का जन्म 31 जुलाई 2020 को हुआ है। वह वर्तमान में शिमला के एक निजी स्कूल में LKG के छात्र हैं। इतनी छोटी उम्र में दुनिया के 195 देशों के झंडों और उनकी भौगोलिक स्थिति को याद रखना उनकी प्रतिभा का परिचायक है। शिवाक्ष की इस उपलब्धि से उनके परिवार, स्कूल और पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
सेब बागवान हैं पिता, मां गृहणी
शिवाक्ष के पिता राजेश रापटा सेब बागवान हैं, जबकि उनकी मां किरण रापटा गृहणी हैं। ग्रामीण और बागवानी पृष्ठभूमि से आने वाले इस परिवार के छह साल के बच्चे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देशों, झंडों और भूगोल से जुड़ी अपनी जानकारी का प्रदर्शन कर अपनी अलग पहचान बनाई है।
परिवार के मुताबिक शिवाक्ष को कम उम्र से ही अलग-अलग देशों के झंडों, उनके नाम और विश्व मानचित्र में उनकी स्थिति जानने में रुचि रही है। धीरे-धीरे यह रुचि उनकी मजबूत याददाश्त और ज्ञान में बदलती गई और उन्होंने इसी प्रतिभा को रिकॉर्ड के रूप में साबित कर दिखाया।
195 देशों के झंडे और मैप पर लोकेशन-दोहरी उपलब्धि
शिवाक्ष की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें केवल झंडों की पहचान ही शामिल नहीं थी। उन्हें 195 देशों के झंडों को पहचानने और उनके नाम बताने के साथ-साथ आउटलाइन वर्ल्ड मैप पर संबंधित देशों की सही लोकेशन बतानी थी। शिवाक्ष ने यह चुनौती महज 12 मिनट 56 सेकंड में पूरी की।
छह साल की उम्र में इतनी बड़ी संख्या में देशों के झंडों और उनकी भौगोलिक स्थिति को याद रखना निश्चित तौर पर असाधारण उपलब्धि मानी जा रही है। शिमला जिले के चौपाल के मडावग जैसे पहाड़ी क्षेत्र से निकलकर शिवक्ष का India Book of Records में नाम दर्ज होना क्षेत्र के लिए भी गौरव की बात है। उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या संसाधनों की मोहताज नहीं होती।सही रुचि, मेहनत और परिवार के प्रोत्साहन से छोटी उम्र में भी बच्चे बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।

