हिमखबर डेस्क
शिमला को देखकर आज शायद ही कोई कल्पना कर पाए कि करीब दो सौ साल पहले यहां की पहचान घने जंगलों के बीच बसे एक छोटी-से पहाड़ी गांव के रूप में थी। आज जहां रिज और मालरोड पर दिनभर सैलानियों की चहल-पहल रहती है, वहीं उस समय यहां न पक्की सड़कें थीं, न बड़े भवन और न ही शहर जैसी कोई व्यवस्था। पहाड़ की ढलानों पर छोटी-छोटी बस्तियां थीं और जंगलों के बीच से गुजरते रास्ते ही लोगों की आवाजाही का सहारा थे। बाहर से आने वाले यात्रियों के लिए पानी की व्यवस्था करने वाला एक फकीर भी यहां रहता था।
1817 को जेरार्ड बंधुओं ने शिमला की दुर्लभ तस्वीर सामने रखी
30 अगस्त 1817 को शिमला पहुंचे ब्रिटिश सर्वेक्षणकर्ता जेरार्ड बंधुओं के विवरण ने उस समय की इस बस्ती की एक दुर्लभ तस्वीर सामने रखी। उनके यात्रा एवं सर्वेक्षण विवरण में इस स्थान का नाम ‘सिमला’ दर्ज है और इसे एक गांव के रूप में बताया गया है। ब्रिटिश अधिकारियों की नजर पड़ने के बाद इस इलाके की कहानी धीरे-धीरे बदलनी शुरू हुई।
‘सिमला’ से शिमला तक
पुराने ब्रिटिश दस्तावेजों और नक्शों में लंबे समय तक शिमला को ‘सिमला’ लिखा गया। ईजे बक की 1904 में प्रकाशित पुस्तक का नाम भी सिमला, पास्ट एंड प्रेजेंट है। समय के साथ हिंदी में ‘शिमला’ नाम प्रचलित हुआ। इसे किसी एक तारीख को हुए नाम परिवर्तन के बजाय वर्तनी और प्रचलन में आए क्रमिक बदलाव के रूप में देखना अधिक उचित है।
1819 में लेफ्टिनेंट रॉस के निवास बनने लगे
अंग्रेजों ने शिमला को किसी खाली जमीन पर अचानक नहीं बसाया। पहले से मौजूद छोटी पहाड़ी बस्ती को उन्होंने अपने प्रशासनिक और ग्रीष्मकालीन ठिकाने के रूप में विकसित किया। 1819 में लेफ्टिनेंट रॉस के यहां निवास बनाने और 1822 में चार्ल्स प्रैट केनेडी के पक्के मकान के बाद शिमला के विकास की गति तेज होती गई।
दो रियासतों से जुड़ी थी जमीन
पुराने बंदोबस्त रिकॉर्ड के हवाले से ईजे बक ने लिखा है कि शिमला क्षेत्र की जमीन पटियाला के महाराजा और क्योंथल के राणा के अधिकारों से जुड़ी थी। अंग्रेजों के प्रभाव बढ़ने के साथ इस क्षेत्र की भूमि और प्रशासनिक व्यवस्था में भी बदलाव आया। यही बदलाव आगे चलकर शिमला के ब्रिटिश शहर के रूप में विकास की नींव बना।
इन किताबों में खंगाला जा सकता है पुराना शिमला
शिमला के इतिहास को समझने के लिए ईजे बक की सिमला, पास्ट एंड प्रेजेंट (1904) प्रमुख स्रोत है। इसके अलावा एचए रोज की पंजाब और उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत की जनजातियों और जातियों का शब्दकोश, 1817 का जेरार्ड बंधुओं का सर्वेक्षण विवरण, पुराने गजेटियर, बंदोबस्त रिपोर्ट और भारत का साम्राज्य कालीन गजेटियर महत्वपूर्ण स्रोत हैं।

