बाजार से क्यों गायब हुई Old Monk Rum? FSSAI की कार्रवाई से सैनिकों के साथ आम लोग भी मायूस

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शाहपुर – नितिश पठानियां

बाजार से इन दिनों ओल्ड मॉन्क रम का स्टॉक गायब होने से लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है। कई दुकानों पर ग्राहक इस ब्रांड की बोतल मांग रहे हैं, लेकिन स्टॉक उपलब्ध न होने के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।

दुकानदारों के अनुसार, कुछ समय से ओल्ड मॉन्क की सप्लाई नियमित न होने के कारण स्टॉक में कमी आई है। सेना कैंटीन में सबसे किफायती दाम के भरोसेमंद ब्रांड बन चुकी ओल्ड मॉन्क रम को लेकर अगर यह कहा जाए कि 72 साल पुराने इस ब्रांड को अब भ्रामक दावे व फ्लेवर स्प्रिंट के साथ परोसा जा रहा है, तो यह बात सभी को अटपटी लग रही है।

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के तहत इस बात का खुलासा हुआ है कि ओल्ड मॉन्क व रॉयल चैलेंज सहित कुछ ओर ऐसे ब्रांड है, जो फ्लेवर स्प्रिंर्ड व भ्रामक दावे के साथ ग्राहकों को गुमराह कर रहे हैं। इसमें सबसे अधिक भरोसेमंद ब्रांड ओल्ड मॉन्क रम कि छवि खराब हुई है।

बता दें कि गोरखा रेजिमेंट का सबसे पसंदीदा ब्रांड बन चुके ओल्ड मॉन्क ब्रांड कि सुबाथू सेना कैंटीन में सबसे ज्यादा डिमांड रहती है। अब सेना कैंटीन में ओल्ड मॉन्क रम की डिमांड के लिए पहुंचने वाले भूतपूर्व सैनिकों को निराशा हाथ लगने लगी है।

भूतपूर्व सैनिकों का कहना है कि ब्रिगेडियर कपिल मोहन के 72 साल पुराने ब्रांड ओल्ड मॉन्क ओर फौज का रिश्ता बहुत पुराना रहा है। बर्फीले पहाड़ों पर कड़ाके की ठंड में तैनात जवान से लेकर सेना के बड़े अधिकारी भी ठंड से निपटने के लिए इसका सहारा लेते हैं।

भूतपूर्व सैनिक कैप्टन दीपक तमांग का कहना है कि कंपनी को खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरा उतरकर ब्रांड को बाजार में लौटना चाहिए।

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