हिमखबर डेस्क
लाला लाजपत राय संग वीरभूमि हिमाचल प्रदेश के 25 क्रांतिकारियों ने भारत को स्वतंत्रता दिलाने की ज्वाला जलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके चलते ब्रिटिश हुकूमत की ओर से धौलाधार की पहाडिय़ों के समीप वर्ष 1913 में बनाई गई धर्मशाला सॅब-जेल में देश के क्रांतिकारी सैनानियों को अलग-थलग करके जेल में बंदी बनाकर रखा गया।
जिसमें देश भर के नौ स्वतंत्रता सैनानियों के साथ-साथ वीरभूमि के कांगड़ा, ज्वालामुखी, पालमपुर, शाहपुर, सुजानपूर संग कई क्षेत्रों के क्रांतिकारी योद्धाओं को भी ब्रिटिश हुकूमत ने जेल की दीवारों में बंदी बनाकर रखा था।
इसके चलते आज भी लाला लाजपत राय जिला एवं मुक्त सुधार गृह धर्मशाला में देश के नौ सैनानियों के नाम आज भी ताम्र पट्टिका में अंकित हैं, साथ ही 25 हिमाचल के जेल में रहने वाले क्रांतिकारियों के नाम भी अलग से अंकित किए हुए हैं। आज भारत आजादी का 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है।

देश भर में स्वतंत्रता संग्राम को चले संघर्ष के बीच पहाड़ी क्षेत्र हिमाचल के कई इलाके भी अंग्रेजों को देश से भगाने के लिए बड़े स्तर पर अंहिसा सहित हिंसात्मक तरीके से अभियान चलाए। जिसके चलते अंग्रेजों को स्वतंत्रता सेनानियों को आवाज को दबाने के लिए उन्हें धर्मशला सॅब-जेल में अलग-थलग से बंदी बनाकर रखा गया।
जिसमें लाला लाजपत राय को भी आंदोलन से दूर रखने के लिए अलग-थलग से ही जेल में रखा गया था। उधर, लाला लाजपत राय जिला एवं मुक्त सुधार गृह धर्मशाला के जेल अधीक्षक विकास भट्टनागर ने बताया कि वर्ष 1913 में ब्रिटिशकाल के दौरान सॅव जेल निर्मित की गई थी। इसके बाद स्वतंत्रता सैनानियों को अलग-थलग धर्मशाला की जेल में रखा जाता था।
इसमें लाला लाजपत राय सहित कई स्वतंत्रता सैनानियों को धर्मशाला जेल में बंदी बनाया गया था। लाला लाजपत राय की कुर्सी व सेल आज भी वैसे ही रखे गए हैं। उन्होंने बताया कि नौ सेनानियों के नाम ताम्र पट्टिका व अन्य के नाम भी जेल में आज भी अंकित रखे गए हैं, जो देश की आजादी के लिए बंदी बने थे।
भारत के ये क्रांतिकारी अलग-थलग बनाए बंदी

लाहौर के वर्तमान पाकिस्तान से लाला लाजपत राय 21 अप्रैल, 1922 से नौ जनवरी, 1923, लुधियाना के मौल्लवी हबिबुर रहमान 1922 व 1942-45, कांगड़ा के बस्सी राम 1922, कांगड़ा के ही सरला मित्र 1922, धर्मशाला के पंचम चंद्र 1922, लाहौर के एस सर्दुल सिंह कावेश्र 1943-46 व 1946, लाहौर के युद्धवीर 1943 से 44 तक, जालधंर के मास्टर काबुल सिंह 1945 व लाहौर के मियां ईफखरूद्दीन 1947 के नाम शामिल हैं।
हिमाचल के ये क्रांतिकारी रहे जेल में

पंचम चंद कटोच धर्मशाला 1922-23 के अलावा अन्य सभी 1941-42 व 1943 के दौरान जेल में बंदी बनाए गए। जिसमें धर्मशाला के ही बहादुर सिंह, मनोहर लाल, सुजानपूर से ज्ञान चंद, तुबी, रूपाल सिंह, ज्वालामुखी से गुरदिता, गसिटू, शरतू, शिंकू, भंगाली, ज्वारी, ब्रह्मू, प्रभु, मंगतु, छुछुरू, पालमपुर के शंभु, कांगड़ा से प्रितम सिंह, जामिन मोहम्मद 1933, ठाकुर दभजु, नूरपुर के रत्न चंद, राम चंद, शाहपुर के गुलाम मोहम्मद व शाकर हरीपुर 1933-34 के नाम शामिल हैं।

