किन्नौर कैलाश यात्रा: रोज जा सकेंगे 375 श्रद्धालु, 72 फीट ऊंचे शिवलिंग के दर्शन के लिए ऐसे करें रजिस्ट्रेशन

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हिमख़बर डेस्क 

हिमाचल प्रदेश में किन्नौर कैलाश यात्रा अधिकारिक रूप से 30 जुलाई से शुरू होगी। जिला प्रशासन ने 10 अगस्त तक यात्रा संचालित करने का निर्णय लिया है। हालांकि, यात्रा की अवधि मौसम की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। आवश्यकता पड़ने पर इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है।

यह यात्रा करीब 19 किलोमीटर के पैदल ट्रैक पर होती है। किन्नौर कैलाश पर 72 फीट ऊंचा शिवलिंग है, जिसके प्रति श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है।

शनिवार को एसडीएम कल्पा और किन्नौर कैलाश यात्रा आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रवीण भारद्वाज की अध्यक्षता में एक बैठक हुई। इसमें यात्रा की तैयारियों की समीक्षा की गई।

वन, पुलिस, स्वास्थ्य, होमगार्ड, जल शक्ति और राजस्व सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों ने बैठक में भाग लिया। पहले 28 जून को यात्रा को अस्थायी रूप से स्थगित किया गया था।

प्रारंभिक रैकी के दौरान कुछ स्थानों पर भूस्खलन और पत्थर गिरने का खतरा सामने आया था। इसके बाद 10 जुलाई को दोबारा रैकी टीम भेजी गई। टीम ने 16 जुलाई को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।

रिपोर्ट के आधार पर संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा और मरम्मत कार्य किए जा रहे हैं। इन कार्यों के पूरा होने के बाद यात्रा शुरू करने का निर्णय लिया गया है।

28 जुलाई से शुरू होगा ऑनलाइन पंजीकरण

किन्नौर कैलाश यात्रा आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रवीण भारद्वाज ने बताया कि ऑनलाइन पंजीकरण 28 जुलाई से शुरू होगा। ऑफलाइन पंजीकरण 30 जुलाई से किया जाएगा।

इस वर्ष प्रतिदिन 375 श्रद्धालुओं को यात्रा की अनुमति दी जाएगी। इनमें 175 ऑनलाइन, 125 ऑफलाइन और 75 स्थान एडवेंचर टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन, किन्नौर के माध्यम से आवंटित किए जाएंगे।

बिना पंजीकरण किसी भी श्रद्धालु को यात्रा की अनुमति नहीं मिलेगी। यात्रा शुरू होने से पहले पैदल मार्ग पर कैमरे, रस्सियां आदि भी लगाए जाएंगे।

यहां से शुरू होगी यात्रा

यात्रा केवल तंगलिंग-मेलिंग खाता-गुफा मार्ग से ही संचालित होगी। बैठक में यात्रा मार्ग पर कानून-व्यवस्था, यातायात और चिकित्सा व्यवस्था पर चर्चा हुई। पेयजल, पंजीकरण, आपदा प्रबंधन और सुरक्षा के लिए भी योजना बनाई गई।

पुलिस, होमगार्ड, स्वास्थ्य, वन, जल शक्ति और राजस्व विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की तैनाती को अंतिम रूप दिया गया।

विभिन्न पड़ावों पर चिकित्सक, फार्मासिस्ट, पुलिस बल, होमगार्ड, वन कर्मी और अन्य आवश्यक स्टाफ तैनात रहेगा।

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