रिटायर्ड आर्मी इंटेलिजेंस अधिकारी का बड़ा आरोप: राजस्व विभाग में पावर ऑफ अटॉर्नी घोटाले का किया खुलासा

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हिमखबर डेस्क

जिला मुख्यालय ऊना निवासी एवं आर्मी इंटेलिजेंस से सेवानिवृत्त अधिकारी मनोज कुमार कौशल ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए घनारी और अम्ब तहसीलों में जमीन की रजिस्ट्री एवं पावर ऑफ अटॉर्नी से जुड़े मामलों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया है।

उन्होंने पत्रकार वार्ता के दौरान दावा किया कि राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें जमीन के वास्तविक मालिकों को जानकारी दिए बिना उनकी संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज तैयार किए गए।

मनोज कुमार कौशल ने बताया कि हरियाणा से आए कुछ लोगों ने घनारी और अम्ब तहसीलों में जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी बनवाई। उनके अनुसार संबंधित कार्यालयों में दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए, फोटोग्राफ लिए गए तथा अन्य आवश्यक औपचारिकताएं भी पूरी कर दी गईं।

हालांकि बाद में हरियाणा में मामले की जांच शुरू होने पर यह तथ्य सामने आया कि जिन जमीनों के संबंध में पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार की गई, उनके वास्तविक मालिकों को इस पूरी प्रक्रिया की कोई जानकारी ही नहीं थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि यदि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाती है तो हिमाचल प्रदेश के संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी उजागर हो सकती है। उनका कहना है कि यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें गंभीर स्तर पर अनियमितताओं की आशंका है, जिसकी विस्तृत जांच आवश्यक है।

मनोज कुमार कौशल ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में उपायुक्त ऊना जतिन लाल को लिखित शिकायत सौंपकर मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने आग्रह किया कि राजस्व रिकॉर्ड, पावर ऑफ अटॉर्नी से जुड़े दस्तावेजों तथा संबंधित अभिलेखों की बारीकी से जांच कराई जाए, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।

उन्होंने कहा कि आम नागरिकों की संपत्तियों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता अत्यंत गंभीर विषय है। यदि जांच में कोई अधिकारी, कर्मचारी अथवा अन्य व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

फिलहाल मामले में संबंधित राजस्व अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, शिकायत के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस मामले की जांच किस स्तर पर करता है और आरोपों की सत्यता को लेकर क्या निष्कर्ष सामने आते हैं।

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