कुल्लू में आपदाओं से निपटने के लिए “10 वें राज्य-स्तरीय मेगा मॉक अभ्यास” का सफल आयोजन, जिले में जिया, तीर्थन घाटी, आनी, पार्वती घाटी में भी किया मॉक ड्रिल का अभ्यास
हिमखबर डेस्क
आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखने और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को मजबूत करने के उद्देश्य से जिला कुल्लू में आज “10वें राज्य-स्तरीय मेगा मॉक अभ्यास का आयोजन किया गया। यह अभ्यास (दिन और रात) दोनों चरणों में संचालित किया गया, जिसमें भूकंप, बादल फटना और वनाग्नि (जंगलों की आग) जैसी गंभीर प्राकृतिक आपदाओं की स्थितियों को री-क्रिएट कर प्रशासनिक तत्परता को परखा गया।
इस मॉक अभ्यास का मुख्य उद्देश्य विभिन्न प्रतिक्रिया टीमों, सुरक्षा बलों और नागरिक सुरक्षा संगठनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा ‘बिजनेस कंटिन्यूटी’ (कार्य निरंतरता) को सुनिश्चित करना था। कुल्लू में यह अभ्यास सुबह 9 से 12 बजे तक मॉक अभ्यास की शुरुआत इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम (IRS) को सक्रिय करने और आपातकालीन परिचालन केंद्रों में तत्काल आवश्यक सुविधाएं बनाने के साथ सम्पन्न हुआ।
इसके बाद वायरलेस संचार व्यवस्था पर स्विच किया गया और रिपोर्ट का विश्लेषण करके स्थितिजन्य जागरूकता बढ़ाई गई। स्वयंसेवकों, नागरिक सुरक्षा और होमगार्ड्स द्वारा प्रारंभिक सामुदायिक प्रतिक्रिया दी गई, जिसकी लाइव स्ट्रीमिंग भी की गई। इसी दौरान एनडीआरएफ और अन्य सुरक्षा बलों की मांग की गई।
कुल्लू जिला में विभिन्न स्थानों पर आपदा के परिदृश्य रचते हुए अभ्यास किया गया गया। इन परिदृश्य में अखाड़ा के क्षेत्र में भूस्खलन होने से 9 मकान ढह गए, जिनके मलबे में से खोज एवं बचाव अभियान में सभी 8 लोग सुरक्षित निकाले गए। भून्तर के जिया पुल गिर जाने से पुल से गुज़र रही बस में सवार 15 लोगों में से 5 लोग नदी में बह गए।
अभियान के दौरान सभी को सुरक्षित बचाया गया जिनमें से एक की मृत्यु हो गई तथा 4 घायलों को तेगूबेहड अस्पताल में उपचार हेतु लाया गया। अभ्यास के दूसरे परिदृष्य में दूसरे खराहल क्षेत्र की पहाड़ियों में साथ वन अग्नि को अभियान के दौरान सफ़ल शमन किया गया।
इसी प्रकार से बंजार में तीर्थन खड्ड में बादल फटने के कारण बाढ़ आने आनी में भूकंप से बागवानी विभाग का भवन गिरने में तीन लोगों का सफल बचाव तथा पार्वती नदी में बाढ़ आने तथा राहत बचाव अभियान को चलाने के परिदृश्य का अभ्यास किया गया।
अभ्यास की समाप्ति के बाद अधिकारियों के साथ विस्तृत ‘डीब्रीफिंग’ (समीक्षा बैठक) आयोजित की गई। इंसीडेंट कमांडर एवं अतिरिक्त उपायुक्त अश्वनी कुमार ने कहा कि इस पूरे अभ्यास के दौरान राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन किया गया।
अभ्यास के दौरान नियुक्त किए गए विभिन्न पर्यवेक्षकों ने अपनी महत्वपूर्ण रिपोर्टिंग और फीडबैक जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को सौंपे हैं, ताकि भविष्य में वास्तविक आपदा के समय कमियों को दूर किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस व्यापक अभ्यास से न केवल सरकारी विभागों की तैयारियों का मूल्यांकन हुआ है, बल्कि आम जनता और स्थानीय समुदायों में भी आपदा के प्रति जागरूकता बढ़ी है।
इस अभ्यास के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संजीव चौहान, उपमंडल अधिकारी निशांत ठाकुर होम गार्ड, आईटीबीपी, ,एनसीसी, एनएसएस के स्वयंसेवी, आपदा मित्र, वन विभाग, एम्बुलेंस कर्मी , स्वास्थ्य विभाग, पैरामेडिकल स्टाफ आदि ने अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।

