काँगड़ा – राजीव जस्वाल
डाक्टर राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा महाविद्यालय टांडा अस्पताल के कॉर्डियोलॉजी ह्रदय रोग विभाग में दो यूनिटों में पूरे सप्ताह ओपीडी चलेगी। यूनिट 1 में सोमवार बुधवार तथा शुक्रवार को कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष एचओडी प्रोफेसर डाक्टर मुकुल भटनागर तथा असिस्टेंस प्रोफेसर डाक्टर जितेंद्र ठाकुर व यूनिट दो मंगलवार, गुरुवार तथा शनिवार को एसोसिएट प्रोफेसर डाक्टर नरेश राणा तथा एसोसिएट प्रोफेसर डाक्टर अंबुधर शर्मा ओपीडी में मरीजों की जांच करेंगे।
इसके साथ रोटेशन में कैथ लैब तथा अन्य ईको टीएमटी टेस्टों सहित सभी टेस्टों को करेंगे, जिससे मरीजों को किसी भी तरह की परेशानियों को न झेलना पड़े। बता दें कि कार्डियोलॉजी विभाग में छह एसआर डाक्टरों के जाने के बाद व्यवस्थाएं चरमरा गई थीं, जिसके चलते रोस्टर को बदलकर व्यवस्थाओं को सुचारू किया जा सके।

जनवरी महीने के बाद से टांडा अस्पताल में छह एसआर डाक्टरों के पद खाली चल रहे थे 21 फरवरी तक एकमात्र एसआर के सहारे कैथ लैब का कार्य चल रहा था, वह इकलौता एक एसआर डाक्टर भी 21 फरवरी को अपना कोर्स ट्रेनिंग समाप्त होने पर जा चुका था।
इसके बाद यहां पर कोई भी एसआर न होने के कारण केवल विशेषज्ञ डाक्टरों के सहारे पूरा कार्य चल रहा है। प्रदेश के दूसरे बड़े अस्पताल में इतनी बड़ी कैथ लैब विशेषज्ञ डाक्टर के सहारे संभालना मुश्किलों तथा चुनौतियों भरा था, क्योंकि टीएमसी के कार्डिलॉजी विभाग में एसआर डाक्टरों की कमी के चलते साथ कैथ लैब इको टेस्टों सहित अन्य टेस्टों के लिए भी मरीजों को भारी परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं।
कैथ लैब में पुरानी मशीनरी तथा स्टाफ की कमी के कारण समस्याओं से मरीजों को जूझना पड़ रहा है। हालांकि टांडा मेडीकल कॉलेज के प्रशासन तथा कार्डियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डा. मुकुल भटनागर ने डीएम के लिए सरकार से स्वीकृति मांगी थी।
बहरहाल प्रदेश के दूसरे बड़े टांडा अस्पताल में 45 विधानसभाओं के छह जिलों चंबा, मंडी, ऊना, हमीरपुर, कुल्लू और 16 लाख से ज्यादा की आबादी वाले सबसे बड़े जिला कांगडा से मरीज उपचार के लिए पहुंचते है।

