पंचवक्त्र महादेव के चरण स्पर्श करने आई ब्यास, मंदिर परिसर को छूता हुआ निकला नदी का पानी

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हिमखबर डेस्क

मंडी में बारिश का तांडव जारी है। अब छोटी काशी मंडी में स्थित पंचवक्त्र महादेव के चरण स्पर्श करने विपाशा नदी पहुंच गई है। मंगलवार को पूरा दिन बारिश का दौर जारी रहने के कारण जहां विपासा(ब्यास) नदी पूरी तरह रौद्र रूप में दिखी।

मंडी में ब्यास और सुकेती नदी के संगम पर स्थित यह मंदिर भगवान शिव के भक्तों के लिए एक महत्त्वपूर्ण तीर्थस्थल है। पंचवक्त्र मंदिर में भगवान शिव की पंचमुखी प्रतिमा है, जो उनके पांच स्वरूपों- ईशान, अघोरा, वामदेव, तत्पुरुष और रूद्र को दर्शाती है।

इस मंदिर का निर्माण 16वीं शताब्दी में हुआ था और यह अपनी अद्भुत वास्तुकला के लिए भी प्रसिद्ध है। यह मंदिर कई बार ब्यास नदी की बाढ़ में भी अडिग़ खड़ा रहा, जिसके कारण भक्तों में इसकी आस्था और भी गहरी हो गई है। जुलाई, 2023 के दौरान भारी बारिश के बाद प्राचीन पंचवक्त्र मंदिर करीब तीन दिन बाद पानी से बाहर आया था।

पानी के सैलाब के कारण मंदिर का दरवाजा भी नहीं खुल पाया था और अंदर सिर्फ नंदी बैल के सींग ही दिखाई दे रहे थे, लेकिन अब दो वर्ष पहले हुए वृतांत को विपाशा नदी दोबारा दोहराने जा रही है।

वहीं, दूसरी तरफ जिला प्रशासन ने मंडी ब्यास नदी की तरफ जाने से लोगों को मनाही की है, क्योंकि पंडोह डैम का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। बल्ह घाटी जलमग्र होने के कारण सुकेती खड्ड खतरे के निशान पर है।

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