हिमाचल में 108 एम्बुलेंस में गूंजी 3060 बच्चों की किलकारी, सिरमौर में सर्वाधिक 809 प्रसव

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हिमाचल में 108 एम्बुलेंस में गूंजी 3060 बच्चों की किलकारी, सिरमौर में सर्वाधिक 809 प्रसव।

मंडी – अजय सूर्या 

हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बन चुकी 108 एम्बुलेंस सेवा ने एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर छू लिया है।

नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) और हिमाचल प्रदेश सरकार के मार्गदर्शन में मेडस्वान फाउंडेशन द्वारा संचालित यह सेवा राज्य में मातृ और नवजात स्वास्थ्य सुरक्षा की नई कहानी लिख रही है।

15 जनवरी 2022 को अपने संचालन की शुरुआत करने के बाद से अब तक 108 एम्बुलेंस सेवा ने 4.27 लाख से अधिक आपात स्थितियों को संभाला है, जिनमें लगभग 78,000 गर्भावस्था से जुड़े मामले शामिल हैं।

सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि अब तक 3,060 से अधिक नवजातों का सुरक्षित जन्म एम्बुलेंस में ही कराया जा चुका है। यानी हर 9 घंटे में औसतन एक सुरक्षित प्रसव।

यह उपलब्धि न केवल राज्य की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को परास्त करने का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे सही योजना, संसाधन और समर्पण के साथ जीवन बचाए जा सकते हैं।

108 एम्बुलेंस सेवा ने हिमाचल प्रदेश में अब तक 3,060 सुरक्षित प्रसव कराए हैं। जिलेवार आंकड़ों पर नज़र डालें तो सिरमौर जिले में सर्वाधिक 809 सुरक्षित प्रसव हुए, जबकि शिमला में 581, कुल्लू में 312, मंडी में 307, और सोलन में 343 प्रसव संपन्न हुए।

चंबा जिले में 238, कांगड़ा में 121, और ऊना में 112 सुरक्षित प्रसव दर्ज किए गए। इसके अलावा, बिलासपुर में 84, हमीरपुर में 76, किन्नौर में 51 और लाहौल-स्पीति में 26 प्रसव कराए गए।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि 108 एम्बुलेंस सेवा प्रदेशभर में गर्भवती महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण जीवन रक्षक सेवा साबित हुई है, खासकर दूर दराज और दुर्गम क्षेत्रों में, जहाँ स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच सीमित है।

हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में जहां कई गांव अभी भी सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं से दूर हैं, वहां 108 एम्बुलेंस सेवा ने जीवनदायिनी भूमिका निभाई है।

प्रशिक्षित स्टाफ और अत्याधुनिक डिलीवरी किट से लैस ये एम्बुलेंस कई बार ऐसे हालात में पहुंचीं जब अस्पताल तक पहुंचना संभव नहीं था, और फिर भी कर्मचारियों ने वाहन में ही सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित किए।

मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करने की दिशा में यह सेवा एक परिवर्तनकारी कदम साबित हुई है। अस्पताल पूर्व देखभाल और संस्थागत सेवाओं के इस अनूठे संयोजन ने कई बार जटिल परिस्थितियों में भी माँ और बच्चे दोनों की जान बचाई है।

108 सेवा की ये संख्या केवल आँकड़े नहीं हैं — यह हर उस परिवार की कहानी है, जिनकी जिंदगी इस सेवा के कारण सुरक्षित हो सकी।

ये वे मुस्कुराते चेहरे हैं जो हर सफल प्रसव के बाद आशा और विश्वास से भर जाते हैं। यह सेवा आज न केवल एक इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम है, बल्कि लोगों के दिलों में बसी एक उम्मीद बन चुकी है।

मेडस्वान फाउंडेशन, NHM और प्रदेश सरकार के इस संयुक्त प्रयास की सफलता हम सबकी साझी विरासत है। फाउंडेशन ने यह संकल्प लिया है कि वह अपनी सेवाओं को और बेहतर बनाकर हर नागरिक तक स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने के मिशन को जारी रखेगा।

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