एक करोड़ी नंबर लेने नहीं आया कोई, अधिकतम बोलीदाता के पंजीकरण फीस जमा करवाने के तीन दिन हुए पूरे

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अधिकतम बोलीदाता के पंजीकरण फीस जमा करवाने के तीन दिन हुए पूरे, अब दूसरे-तीसरे की बारी।

शिमला – नितिश पठानियां 

वीआईपी नंबर एचपी 99-9999 को खरीदने अभी तक कोई नहीं आया है। वीआईपी नंबर के लिए नीलामी की प्रक्रिया शुक्रवार को पूरी हो चुकी है।

इसके बाद नंबर खरीदने वाले व्यक्ति को 30 प्रतिशत पंजीकरण फीस तीन दिनों के अंदर जमा करवानी होती है।

वीवीआईपी नंबर के लिए अधिकतम बोली लगाने वाले बोलीदाता के पास सोमवार रात 12 बजे तक 30 प्रतिशत पंजीकरण फीस जमा करवाने का मौका था।

सोमवार देर शाम खबर लिखे जाने तक अधिकतम बोलीदाता ने पंजीकरण फीस जमा नहीं करवाई थी।

अधिकतम बोलीदाता 30 प्रतिशत फीस जमा नहीं करवाता है, तो फिर दूसरे नंबर के बोलीदाता को मौका मिलेगा।

इस बोलीदाता को भी पंजीकरण फीस की 30 फीसदी राशि जमा करवाने के लिए तीन दिनों का समय दिया जाएगा।

अगर तीन दिनों के भीतर यह भी पंजीकरण फीस जमा नहीं करवाता है, तो फिर तीसरे नंबर के बोलीदाता को नंबर खरीदने का मौका मिलेगा।

अगर तीनों में से कोई भी नंबर नहीं खरीदता हैं, तो फिर इस नंबर के लिए दोबारा से नीलामी होगी।

वहीं करोड़ों रुपए की बोली लगाने वाले बोलीदाताओं के खिलाफ अगली कार्रवाई भी परिवहन विभाग की ओर से की जाएगी।

एचपी 99-9999 नंबर के लिए देशराज नाम के व्यक्ति ने सबसे ज्यादा 1 करोड 12 लाख 15 हजार 500 रुपए की बोली दी है।

दूसरे नंबर पर संजय कुमार हैं, जिन्होंने एक करोड़ 11000 रुपए की बोली लगाई है। तीसरे नंबर पर धर्मवीर सिंह हैं, जिन्होंने एक करोड़ 500 रुपए इस नंबर के लिए बोली में लगाए हैं।

उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने परिवहन निदेशक को निर्देश दिए हैं कि यदि यह नंबर नहीं जाता है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी करने के मामले में केस दर्ज किया जाए।

परिवहन विभाग के निदेशक अनुपम कश्यप ने बताया कि इस बोली में शामिल होने के लिए इन्होंने रजिस्ट्रेशन फीस भरी है और वह ऑनलाइन ट्रांसफर हुई है। हालांकि जो एड्रेस दिए गए हैं, उनमें से कुछ फर्जी लग रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने मांगी थी डिटेल

इस वीआईपी नंबर के लिए हुई नीलामी ने न सिर्फ राज्य सरकार का ध्यान खींचा है, बल्कि इनकम टैक्स और अन्य एजेंसियों की नजर भी अब है।

परिवहन विभाग और जिला प्रशासन शिमला से कुछ एजेंसी होने संपर्क भी किया है। यह संपर्क इसलिए किया जा रहा है, ताकि इनका एड्रेस पता किया जा सके।

गुरुवार को जब यह मामला सोशल मीडिया पर उठा था तो मुख्यमंत्री ने भी इस बारे में डिटेल मांगी थी।

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