हिमखबर डेस्क
हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव के लिए छह दिन बाद वोटिंग शुरू होगी। वहीं, शिमला जिला के चौपाल से एक ऐसी शिकायत पहुंची है जिसने आगामी पंचायत चुनाव की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नेरवा तहसील की ग्राम पंचायत पवाहन के वार्ड नंबर-4 भाटगढ़ में 61 मतदाताओं के नाम हिमाचल और उत्तराखंड दोनों राज्यों की मतदाता सूचियों में दर्ज होने का आरोप लगाया गया है।शिकायतकर्ता देवा नंद शर्मा ने राज्य चुनाव आयोग को भेजे पत्र में दावा किया है कि पंचायत की मतदाता सूची में बड़ी संख्या में ऐसे लोगों के नाम शामिल हैं जो या तो दो राज्यों में वोटर के रूप में पंजीकृत हैं या फिर लंबे समय से बाहरी राज्यों में रह रहे हैं।
आरोप यह भी लगाया गया है कि कुछ नाम कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दर्ज किए गए हैं। चौपाल की नेरवा तहसील की ग्राम पंचायत पवाहन के स्थानीय निवासी देवा नंद शर्मा ने जिला निर्वाचन अधिकारी को दी शिकायत में लिखा है कि पवाहन पंचायत की वर्तमान मतदाता सूची में गंभीर अनियमितताएं हैं।
पंचायत चुनावों को लेकर हाल ही में जब मतदाता सूची का अवलोकन किया गया, तो पाया गया कि इसमें बड़ी संख्या में ऐसे नाम शामिल हैं जो हिमाचल के साथ-साथ उत्तराखंड की मतदाता सूची में भी पंजीकृत हैं। इनमें से कई वोट फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बनाए गए हैं, जबकि कुछ लोग लंबे समय से बाहरी राज्य में रह रहे हैं और वहां भी उनके वोट हैं।
शिकायकर्ता के अनुसार दोहरे पंजीकरण के इस प्रकरण से न केवल चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित होगी, बल्कि यह स्थानीय निवासियों के लोकतांत्रिक अधिकारों का भी हनन है। देवा नंद शर्मा और उनके साथ कुछ अन्य लोगों का कहना है कि ग्राम पंचायत के वार्ड नं. 4 (भाटगढ़) मतदाता सूची की फिर से निष्पक्षता से जांच करवाई जाए।
इस सूची में 61 मतदाता ऐसे हैं जो हिमाचल के साथ-साथ उत्तराखंड मतदाता सूची में भी पंजीकृत है और इनमें से 8 मतदाता उत्तराखंड के स्थाई निवासी हैं, इनमें से कुछ शेड्यूल ट्राइव हैं और उसके तहत लाभ भी उठाते हैं, उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग की 13 मई 2026 की मतदाता सूची में भी इनका नाम है।
उन्होंने कहा कि ये सभी साक्ष्य जिला निर्वाचन अधिकारी को सौंपे हैं। उन्होंने मांग की कि दो राज्यों में पंजीकृत होने के चलते इन मतदाताओं को मतदान का अधिकार न दिया जाए। उन्होंने ये भी दावा किया कि इन 61 में एक मतदाता ऐसी भी हैं जो हाल ही में उत्तराखंड में पंचायत चुनावों में वार्ड की सदस्य तक चुनी गई हैं।
शिकायकर्ता ने शिकायत पत्र के साथ साक्ष्य के तौर पर उन 61 मतदाताओं की सूची भी दी है। साथ ही उस क्षेत्र की उत्तराखंड राज्य की मतदाता सूची भी दी है। देवा नंद शर्मा ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने अपने प्रत्याशी को जिताने के लिए ये फर्जी वोट बनाए हैं।
इसी पंचायत के भाटगढ़ गांव के रहने वाले पंकज शर्मा ने आरोप लगाया कि ये 61 लोग पूरी तरह से फर्जी वोटर हैं, इसमें कुछ लोग उत्तराखंड में अनुसूचित जनजाति वर्ग से भी आते हैं और कुछ तो सरकारी नौकरी भी करते हैं और कुछ चुने हुए प्रतिनिधि भी हैं।
उन्होंने कहा कि हमने जब मतदाता सूची देखी तो हम हैरान रह गए कि एक 80 वर्ष के बुजुर्ग का नाम भी मतदाता सूची में दर्ज है, जोकि इससे पहले कभी भी यहां का वोटर नहीं रहा है और इसी साल यानी 2026 में उसका नाम मतदाता सूची में दर्ज किया गया।
पंकज शर्मा ने मांग की कि जो फर्जी वोटर हैं, उन्हें मतदान का अधिकार न दिया जाए हालांकि शिकायकर्ता ने माना की तय समय में आपत्ति दर्ज नहीं की गई, शिकायत करने में देरी हुई है, लेकिन इस मामले की जांच होना बेहद जरूरी है तोकि संवैधानिक प्रावधानों के तहत ही चुनाव हों।
क्या कहते हैं शिमला के डीसी
इस मामले पर जिला निर्वाचन अधिकारी और उपायुक्त अनुपम कश्यप हुई बातचीत में पुष्टि की कि शिकायत 18 मई को प्राप्त हुई थी। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों पर आपत्ति दर्ज करवाने के लिए पहले ही समय दिया गया था।
उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच संबंधित खंड विकास अधिकारी से करवाई गई, जिसमें पाया गया कि जिन लोगों के नाम पर सवाल उठाए गए हैं, वे क्षेत्र के स्थायी निवासी हैं और इनमें से कुछ के नाम पर जमीन भी है।
उन्होंने यह भी माना कि शिकायत में जिन लोगों के नाम उत्तराखंड की मतदाता सूची में दर्ज होने का दावा किया गया है, ये मामला अब केवल जिला निर्वाचन अधिकारी के अधिकार क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि चूंकि मामला दो राज्यों की मतदाता सूचियों से जुड़ा है, इसलिए इस मामले को आगे कार्रवाई के लिए राज्य निर्वाचन आयोग को भेज दिया गया है।
किसने की है शिकायत
शिकायतकर्ता देवा नंद शर्मा 27 वर्षीय युवा हैं और पॉलिटिकल साइंस में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। वर्तमान में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और सामाजिक कार्यों से भी जुड़े हैं, जबकि पंकज शर्मा भी युवा हैं।
पंचायत चुनावों में मतदान के कुछ ही दिन पहले सामने आया यह मामला अब केवल एक पंचायत तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इससे हिमाचल और उत्तराखंड की सीमा से जुड़े कई इलाकों की मतदाता सूचियों पर भी सवाल उठने लगे हैं। अब सबकी निगाहें राज्य निर्वाचन आयोग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।

