हिमखबर डेस्क
हिमाचल प्रदेश की विश्व प्रसिद्ध पोंग झील (महाराणा प्रताप सागर) ने एक बार फिर वन्यजीव प्रेमियों और पक्षी विशेषज्ञों का ध्यान अपनी तरफ केंद्रित किया है। दरअसल,पहली मर्तबा दुर्लभ पक्षी नॉब-बिल्ड डक को पोंग जलाशय में अठखेलियां करते देखा गया है।
दुर्लभ पक्षी की मौजूदगी को पक्षी संरक्षण और जैव विविधता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। जलाशय में वनरक्षक अंकुश धीमान ने रविवार सुबह 8 बजे के आसपास तस्वीरों के कैमरे में कैद किया है।
नॉब-बिल्ड डक की पहचान इसकी चोंच के ऊपरी हिस्से पर बनी काली गांठ नुमा संरचना से होती है, जिसे “नॉब” कहा जाता है। विशेष रूप से नर पक्षी में यह उभार काफी स्पष्ट दिखाई देता है। इसका विशाल शरीर, चमकदार पंख और अनोखा स्वरूप इसे अन्य जल पक्षियों से अलग बनाता है। भारत में यह प्रजाति अपेक्षाकृत कम दिखाई देती है और आमतौर पर बड़े जलाशयों, दलदली क्षेत्रों तथा आर्द्रभूमियों में पाई जाती है।
पक्षी विशेषज्ञों का मानना है कि पोंग में इस प्रजाति का दिखना इस बात का संकेत है कि यहां की पारिस्थितिकी अब भी दुर्लभ और संवेदनशील पक्षियों को आकर्षित करने में सक्षम है। यह रिकॉर्डिंग भविष्य में पक्षी अनुसंधान और संरक्षण गतिविधियों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
पोंग झील का इतिहास भी कम रोचक नहीं है। वर्ष 1975 में बने पोंग बांध ने समय के साथ एक आर्द्रभूमि का रूप ले लिया। वर्ष 1983 में इसे वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया और वर्ष 2002 में अंतरराष्ट्रीय महत्व की रामसर साइट का दर्जा मिला। मौजूदा समय में यह एशिया के प्रमुख प्रवासी पक्षी आवासों में गिनी जाती है।
हर सर्दी में साइबेरिया, मंगोलिया, चीन, मध्य एशिया और यूरोप के विभिन्न हिस्सों से लाखों प्रवासी पक्षी यहां पहुंचते हैं। बार-हेडेड गूज, नॉर्दर्न पिनटेल, कॉमन टील, रुडी शेलडक, कार्मोरेंट और अनेक दुर्लभ पक्षियों की मौजूदगी के कारण पोंग को “बर्ड पैराडाइज” भी कहा जाता है।
पोंग झील पहले भी कई दुर्लभ पक्षी प्रजातियों की मेजबानी कर चुकी है, लेकिन नॉब-बिल्ड डक की पहली रिकॉर्डिंग इस सूची में एक नया और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ती है। यह घटना न केवल हिमाचल प्रदेश, बल्कि पूरे उत्तर भारत के पक्षी संरक्षण प्रयासों के लिए उत्साहजनक मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पोंग की आर्द्रभूमि, जल गुणवत्ता और प्राकृतिक आवासों का संरक्षण इसी प्रकार जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में यहां और भी दुर्लभ तथा विलुप्तप्राय प्रजातियों के दस्तावेजीकरण की संभावना बढ़ेगी। नॉब-बिल्ड डक की यह ऐतिहासिक उपस्थिति एक बार फिर साबित करती है कि पोंग झील केवल एक जलाशय नहीं, बल्कि जैव विविधता का जीवंत खजाना है।
डीएफओ वाइल्डलाइफ हमीरपुर रेजिनाल्ड रॉयस्टन के बोल
डीएफओ वाइल्डलाइफ हमीरपुर रेजिनाल्ड रॉयस्टन ने बातचीत में पोंग वन्यजीव अभयारण्य में नॉब-बिल्ड डक की मौजूदगी की पुष्टि करते हुए कहा कि यह पोंग की समृद्ध जैव विविधता और स्वस्थ आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र का सकारात्मक संकेत है।
उन्होंने कहा कि इस दुर्लभ जलपक्षी का पहली बार रिकॉर्ड होना वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह दर्शाता है कि पोंग झील आज भी प्रवासी एवं दुर्लभ पक्षी प्रजातियों के लिए सुरक्षित और अनुकूल आवास बनी हुई है।

