सफलता की कहानी – मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना बनी सहारा, निराश्रित सीता राम को दिया आत्मनिर्भर जीवन का नया आधार

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हिमख़बर डेस्क 
कभी जीवन में ऐसा दौर भी था जब कुल्लू जिला की लग घाटी के सालंग गांव के 24 वर्षीय सीता राम के सामने भविष्य पूरी तरह अनिश्चित दिखाई देता था।
माता-पिता का साया सिर से उठ चुका था। जीवन यापन का कोई स्थायी साधन नहीं था और परिस्थितियां इतनी कठिन थीं कि आगे की राह दिखाई नहीं देती थी।
ऐसे समय में प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना उनके लिए आशा की किरण बनकर सामने आई।
मुख्यमंत्री, सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने 0 से 27 वर्ष के निराश्रित बच्चों और युवाओं के लिए उनके पालन पोषण शिक्षा दीक्षा और उच्च शिक्षा की संपूर्ण व्यवस्था के अतिरिक्त रोजगार के अवसर भी प्रदान किये जा रहे हैं।
इस योजना में की गई है। जिससे यह बच्चे मुख्यमंत्री की संवेदनशील सोच और उदार नीति की वजह से चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट बनकर सम्मानजनक जीवन जी का रहे हैं
केवल आर्थिक सहायता का प्रावधान ही नहीं किया है, बल्कि उन्हें सम्मानपूर्वक और आत्मनिर्भर जीवन जीने का अवसर भी प्रदान किया है। इसी सोच का जीवंत उदाहरण हैं सीता राम, जिनके जीवन में सुखाश्रय योजना ने नया अध्याय लिख दिया।
सीता राम बताते हैं कि माता-पिता के निधन के बाद उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने भविष्य को सुरक्षित करने की थी। रहने के लिए उचित व्यवस्था नहीं थी और रोजगार का कोई साधन भी उपलब्ध नहीं था। ऐसे समय में सरकार ने उनके लिए अभिभावक की भूमिका निभाई।
योजना के तहत उन्हें अपना घर बनाने के लिए तीन लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई। इसके साथ ही स्वरोजगार स्थापित करने के लिए दो लाख रुपये की अतिरिक्त आर्थिक सहायता भी उपलब्ध करवाई गई।
सरकार ने केवल आर्थिक मदद तक ही अपने दायित्व को सीमित नहीं रखा। सीता राम को राफ्टिंग गतिविधि से जोड़ने के लिए विधिवत निःशुल्क प्रशिक्षण भी उपलब्ध करवाया गया ताकि वे स्वयं अपने पैरों पर खड़े हो सकें। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्होंने राफ्ट खरीदी और व्यास नदी में राफ्टिंग का कार्य आरम्भ किया।
आज सीता राम सफलतापूर्वक राफ्टिंग व्यवसाय से जुड़े हुए हैं और प्रतिमाह लगभग 40 से 50 हजार रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। कभी जिनके सामने आजीविका का संकट था, वे आज आत्मविश्वास के साथ अपना जीवन संचालित कर रहे हैं।
व्यास नदी की लहरों के बीच पर्यटकों को सुरक्षित और रोमांचक राफ्टिंग अनुभव प्रदान करते हुए उनके चेहरे पर आत्मनिर्भरता की चमक साफ दिखाई देती है।
सीता राम भावुक होकर कहते हैं कि सरकार ने केवल आर्थिक सहायता नहीं दी, बल्कि उन्हें जीवन में आगे बढ़ने का विश्वास भी दिया।
उन्होंने मुख्यमंत्री, सुखविंद्र सिंह सुक्खू और प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि सुखाश्रय योजना का सहारा न मिलता तो शायद उनके लिए सम्मानजनक जीवन की कल्पना करना भी कठिन होता। आज वे आत्मसम्मान के साथ जीवन जी रहे हैं और अपने भविष्य को लेकर आशावान हैं।
मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना इस बात का प्रमाण है कि संवेदनशील शासन व्यवस्था केवल योजनाएं नहीं बनाती, बल्कि जरूरतमंद लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन भी लाती है।
निराश्रित बच्चों और युवाओं के लिए सरकार अभिभावक बनकर खड़ी है, उनकी शिक्षा, देखभाल, आवास और रोजगार की जिम्मेदारी निभा रही है।
सीता राम की कहानी इसी मानवीय सोच और जनकल्याणकारी दृष्टिकोण की प्रेरक मिसाल है।
यह केवल एक व्यक्ति की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि उस विश्वास की कहानी है कि जब सरकार संवेदनशीलता और संकल्प के साथ कार्य करती है, तो जीवन की कठिन परिस्थितियों से जूझ रहे लोगों को भी नई दिशा, नया आत्मविश्वास और सम्मानजनक भविष्य मिल सकता है।
मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना आज प्रदेश के अनेक निराश्रित बच्चों और युवाओं के जीवन में उम्मीद, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का नया अध्याय लिख रही है।
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