दिल्ली विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों का कांगड़ा दौरा, हिमालयी भूगोल व आपदा प्रबंधन का लिया अनुभव

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उपायुक्त ने फील्ड विजिट पर आए विद्यार्थियों से किया संवाद, साझा किए आपदा प्रबंधन के अहम पहलू, दिल्ली विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों का कांगड़ा में शैक्षणिक फील्ड विजिट, आपदा प्रबंधन व हिमालयी भूगोल का ले रहे हैं व्यावहारिक अनुभव

हिमखबर डेस्क

दिल्ली विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के विद्यार्थियों का एक शैक्षणिक दल इन दिनों जिला कांगड़ा के फील्ड विजिट पर पहुंचा हुआ है। यह भ्रमण 7 अप्रैल से 12 अप्रैल 2026 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें कुल 57 विद्यार्थी एवं 4 संकाय सदस्य भाग ले रहे हैं। इस फील्ड विजिट का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को हिमालयी भूगोल, पर्यावरणीय अध्ययन, भू-वैज्ञानिक प्रक्रियाओं तथा आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है।

अपने प्रवास के दौरान विद्यार्थी जिला कांगड़ा के विभिन्न महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण कर रहे हैं। इस दौरान वे भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों, ढलान अस्थिरता, फ्लैश फ्लड, भूमि धंसाव तथा बाढ़ संभावित क्षेत्रों का प्रत्यक्ष अध्ययन कर रहे हैं।

इसी क्रम में विद्यार्थियों ने वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी का भी दौरा किया, जहां उन्हें हिमालयी भूगर्भीय संरचना एवं संबंधित अनुसंधान कार्यों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।

इसके अतिरिक्त, विद्यार्थियों द्वारा नोरबुलिंगका संस्थान, बैजनाथ मंदिर तथा सौरभ वन विहार सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण प्रस्तावित है, जहां वे क्षेत्रीय भू-परिस्थितियों एवं पर्यावरणीय पहलुओं को नजदीक से समझेंगे। साथ ही पोंग डैम का निरीक्षण भी निर्धारित है, जहां विद्यार्थी जलाशय प्रबंधन तथा व्यास नदी के डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में संभावित बाढ़ जोखिम का अध्ययन करेंगे।

आज उपायुक्त कार्यालय के सभागार में 

उपायुक्त हेमराज बैरवा ने विद्यार्थियों के साथ संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों को जिला कांगड़ा की भौगोलिक विशेषताओं एवं आपदा संवेदनशीलता के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कांगड़ा जिला भूकंप, भूस्खलन, फ्लैश फ्लड, वनाग्नि एवं बाढ़ जैसी विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील है।

उपायुक्त ने यह भी बताया कि जिला प्रशासन एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण कांगड़ा द्वारा आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पूर्व तैयारी, त्वरित प्रतिक्रिया तथा पुनर्वास की सुदृढ़ व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को आपदा प्रबंधन में सामुदायिक सहभागिता, जागरूकता एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया।

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